प्रशासन की नाक के नीचे चिलर प्लांट का ताला तोड़कर उड़ाए कॉपर वायर, पुलिस गश्त और आउटसोर्स सुरक्षा तंत्र की खुली पोल
Junaid Khan - शहडोल। सरकारी दावों और प्रशासनिक चौकसी की धज्जियां उड़ाते हुए शहडोल मेडिकल कॉलेज में दिनदहाड़े एक बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील हिस्से माने जाने वाले चिलर प्लांट की छत का ताला तोड़कर बेखौफ बदमाशों ने एसी के कीमती कॉपर वायर पर हाथ साफ कर दिया। दोपहर करीब 2 बजे घटित इस घटना ने न केवल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन बल्कि पुलिस गश्त व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। आउटसोर्स कर्मचारियों की सतर्कता के कारण यद्यपि आरोपी भागने में सफल रहा, लेकिन यह वारदात साफ बयां करती है कि स्वास्थ्य संस्थान जैसे अति-महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। अगर दिनदहाड़े परिसर के भीतर प्रवेश कर ताले तोड़े जा सकते हैं, तो फिर रात के अंधेरे में मरीजों और करोड़ों के उपकरणों की सुरक्षा का जिम्मा किसके भरोसे है? घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल अधीक्षक की शिकायत पर सोहागपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर औपचारिक जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता पर उठता है। आउटसोर्स कर्मचारियों ने मौके पर आरोपी को कटे हुए कॉपर वायर के साथ भागते हुए देखा, मगर सुरक्षाकर्मियों के समय पर न पहुंचने से आरोपी चोरी का कुछ सामान समेटकर रफूचक्कर होने में कामयाब रहा। इस पूरी घटना से यह भी उजागर होता है कि आउटसोर्सिंग के नाम पर जिस निजी सुरक्षा एजेंसी को भारी-भरकम बजट दिया जा रहा है, उसकी कार्यप्रणाली में भारी खामियां हैं। इस वारदात ने पूरे पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के उच्च अधिकारियों के कामकाज की शैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। करोड़ों की लागत से बने बुनियादी ढांचे और एयरConditioning व्यवस्था को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। क्षेत्रीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह केवल एक मामूली चोरी की कोशिश नहीं, बल्कि पुलिस की लचर गश्त और अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है। यदि समय रहते सुरक्षा ऑडिट कराकर जिम्मेदारों और नाकाम सुरक्षा एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़ी आपराधिक घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
