बांधवगढ़ बफर जोन से सटे सेमरी में बाघ के हमले से ग्रामीण लहूलुहान,जनप्रतिनिधियों के खोखले दावों और प्रशासनिक लापरवाही के बीच फिर उठा सुरक्षा तंत्र पर बड़ा सवाल
Junaid Khan - शहडोल। मानपुर (उमरिया)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन अंतर्गत मानपुर के वार्ड क्रमांक 2 से लगे सेमरी जंगल में रविवार की सुबह बाघ के हमले से 50 वर्षीय शंकर पटेल (निवासी सेमरी टोला) गंभीर रूप से घायल हो गए। बाघ ने अचानक हमला कर उनके हाथ, पेट और पैर को बुरी तरह नोच डाला। लहुलुहान हालत में ग्रामीण को आनन-फानन में मानपुर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, सहायक संचालक, वन परिक्षेत्र अधिकारी मानपुर व ताला सहित पूरा वन अमला मौके पर पहुंचा और आनन-फानन में जंगल की ओर जाने पर रोक लगाते हुए गश्त बढ़ाने का दावा किया। हालांकि, महज "अलर्ट जारी करने" और समझाइश देने का बहाना बनाकर वन विभाग के उच्च अधिकारी और स्थानीय प्रशासन अपनी आपराधिक लापरवाही से पल्ला नहीं झाड़ सकते। क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे। मानव-वन्यजीव संघर्ष के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि (विधायक, सांसद व मंत्री) इस मुद्दे पर ठोस कदम उठा रहे हैं और न ही वन विभाग के आला अफसर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम कर पा रहे हैं। आए दिन जंगलों से सटे रिहायशी इलाकों में खूंखार वन्यजीवों की मौजूदगी से ग्रामीणों के जीवन पर मौत का साया मंडरा रहा है। महज औपचारिक अलर्ट जारी कर ग्रामीणों के सिर पर खतरा छोड़ देना प्रशासनिक नाकामी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का जीता-जागता प्रमाण है। विभागीय अफसर और सत्ता में बैठे जिम्मेदार केवल हादसों के बाद मौके पर निरीक्षण का ढोंग रचते हैं, जबकि बफर जोन की घेराबंदी, सोलर फेंसिंग और प्रभावी ट्रैकिंग जैसे जमीनी कार्य फाइलों में दबे पड़े हैं। अगर समय रहते स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वन्यजीवों की आवाजाही को नियंत्रित करने और रिहायशी बस्तियों की सुरक्षा के सख्त उपाय करते, तो आज सेमरी के ग्रामीण को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़ती। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक शासन-प्रशासन और वन महकमे की इस अनदेखी की कीमत निर्दोष ग्रामीणों को अपने खून से चुकानी पड़ेगी?
