अनूपपुर से कदौड़ी परमिट की आड़ में अंतरराज्यीय सीमा तक अवैध दौड़, RTO, पुलिस और कलेक्टर की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। ग्राम पंचायत जामथान के पास सोमवार को हुए भीषण बस हादसे ने एक बार फिर जिला प्रशासन, परिवहन विभाग (RTO), और यातायात पुलिस के नाकारा रवैये की पोल खोलकर रख दी है। अनूपपुर से कदौड़ी तक के परमिट पर चल रही यह बस नियमों को ताक पर रखकर सीमा लांघते हुए छत्तीसगढ़ के कुमारपुर चौकी, जनकपुर और सीधी थाना क्षेत्रों तक बेधड़क दौड़ती रही। दर्जनों यात्रियों के लहूलुहान होने के बावजूद आरटीओ विभाग, पुलिस प्रशासन और जिला कलेक्टर का मौन यह साबित करता है कि जनता की जान की कीमत इन अफसरों के लिए कौड़ियों के मोल है। लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न करना साफ इशारा करता है कि जिम्मेदार विभागों और बस माफियाओं के बीच सांठगांठ का खेल चल रहा है।
जनप्रतिनिधि और तंत्र लाचार,बड़े हादसे के इंतजार में बैठा सिस्टम
मामले की सबसे डरावनी सच्चाई यह है कि इस अवैध संचालन और परमिट उल्लंघन की लिखित शिकायतें बहुत पहले ही पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर और परिवहन अधिकारियों तक पहुंचा दी गई थीं। इसके बावजूद न तो कटनी-जबलपुर के शेड्यूल में उलझे परिवहन अधिकारियों ने सुध ली और न ही स्थानीय यातायात पुलिस ने कोई सख्त कदम उठाया। आखिर जिले के सांसद, विधायक और जन प्रतिनिधि इस गंभीर लापरवाही पर खामोश क्यों हैं? क्या प्रशासन और शासन में बैठे जिम्मेदार किसी बड़े नरसंहार या जनहानि का इंतजार कर रहे हैं? अगर इस हादसे में किसी की जान चली जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, वरना फूटेगा जनाक्रोश
हादसे के बाद केवल जांच का ढोंग रचना और कागजी खानापूर्ति करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना परमिट, बिना फिटनेस और नियमों को धता बताकर दौड़ रही यात्री बसों पर तुरंत नकेल कसना अनिवार्य है। यदि जिला प्रशासन, आरटीओ और यातायात पुलिस ने समय रहते परमिट, रूट और ओवरलोडिंग की कड़ाई से जांच कर दोषियों और दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। शासन-प्रशासन को अब नींद से जागकर जनसुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी, वरना जनता का गुस्सा सड़कों पर उतरने में देर नहीं लगेगी।
