वरिष्ठ नागरिकों का हुआ भव्य सम्मान,शिक्षा विभाग और प्रशासन ने विद्यालय प्रबंधन की दूरदर्शिता को सराहा
Junaid Khan - शहडोल। बुढ़ार स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ग्रीन बेल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 12 सितंबर 2026 को ‘ग्रैंड पेरेंट्स डे’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन अत्यंत उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के दादा-दादी और नाना-नानी ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराकर समारोह को नई आभामंडल प्रदान की। विद्यालय प्रांगण पहुँचने पर शिक्षकों द्वारा सभी पूज्य वरिष्ठ जनों का वैदिक रीति से तिलक लगाकर एवं माल्यार्पण कर भावभीना अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों के मनोरंजन के लिए विशेष खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रमों का समायोजन किया गया, जिसमें बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने जीवन के स्वर्णिम बचपन की यादों को तरोताजा किया। उपस्थित दादा-दादी व नाना-नानी ने भावुक होकर कहा, "आज का दिन हमारे जीवन का सबसे यादगार क्षण बन गया है, ऐसा प्रतीत हुआ मानो हमने फिर से अपना बचपन जी लिया हो।" उन्होंने इस अनुपम आयोजन के लिए विद्यालय परिवार का हृदय से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रबंधन द्वारा सभी सम्पादित वरिष्ठ नागरिकों को सप्रेम उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया।
शिक्षा, संस्कार और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का उत्कृष्ट समन्वय यह भव्य आयोजन केवल एक सांस्कृतिक मंच तक सीमित न होकर, भारतीय संस्कृति के मूल आधार पितृ देवो भव:' के संकल्प को धरातल पर चरितार्थ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ है। वर्तमान समय में जहाँ एकल परिवारों का चलन बढ़ रहा है, वहीं ग्रीन बेल्स स्कूल के संचालक मास्टर साहब (प्रबंधक) की दूरदर्शी सोच और अनुशासित मार्गदर्शन ने क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की स्थापना का एक नया मानदंड स्थापित किया है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मध्य प्रदेश सरकार की नैतिक शिक्षा एवं समाज कल्याण की प्राथमिकताओं को बुढ़ार का यह शिक्षण संस्थान पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहा है। संभागीय एवं जिला स्तर के संबंधित शिक्षा अधिकारियों ने इस आयोजन का संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे नवाचार अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और बुजुर्गों के सम्मान से जोड़ने का कार्य करते हैं। विद्यालय प्रबंधन, समर्पित शिक्षक वर्ग और मास्टर साहब का यह प्रयास पूरे शहडोल अंचल में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और प्रशासन ऐसे जनसरोकारी कार्यों की निरंतर सराहना करता है।
