खबर का असर-लाचार मां के संघर्ष और जन सरोकार की पत्रकारिता का बड़ा असर,दिव्यांग राजकुमार को मिली मोटराइज्ड साइकिल

कलेक्टर पार्थ जायसवाल की संवेदनशील पहल से राजकुमार के सपनों को मिली नई उड़ान,बस में मुफ्त यात्रा और हॉस्टल की भी व्यवस्था 


Junaid Khan - शहडोल। निष्पक्ष और जन सरोकार से जुड़ी पत्रकारिता जब समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनती है, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है और संवेदनहीनता के तंत्र में संवेदना का संचार होता है। समाचार पत्र में '10 किमी दूर पीठ पर लादकर बेटे को स्कूल पहुंचा रही लाचार मां' शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित खबर ने सोए हुए प्रशासनिक अमले को जगा दिया। खबर का व्यापक असर यह हुआ कि जिला प्रशासन और कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर के दौरान कलेक्टर ने दरशिला निवासी 12वीं कक्षा के दिव्यांग छात्र राजकुमार जायसवाल की पीड़ा को समझा और बिना किसी कागजी अड़ंगे के त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें मोटराइज्ड तीन पहिया साइकिल (इलेक्ट्रिक स्कूटी) प्रदान की। इसके साथ ही छात्र को स्कूल आने-जाने के लिए बस में निःशुल्क यात्रा पास और छात्रावास में रहने के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए, जिससे वर्षों से चला आ रहा मां-बेटे का दर्दनाक संघर्ष एक सुखद मोड़ पर आकर समाप्त हुआ। अखबार की इस मुहिम और जिला प्रशासन की त्वरित, संवेदनशील पहल के चलते अब दिव्यांग राजकुमार की शिक्षा में गरीबी या शारीरिक अक्षमता बाधक नहीं बनेगी। बीते दिनों तक जो मां अपने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए रोज 20 किलोमीटर का पथरीला और कठिन सफर अपनी पीठ पर लादकर तय करने को मजबूर थी, उसकी आंखों में अब मजबूरी के आंसू नहीं, बल्कि राहत और उम्मीद की चमक है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल की इस त्वरित कार्यशैली ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासनिक मंशा साफ हो और अधिकारी संवेदनशील हों, तो नियम-कायदे जनसेवा के रास्ते में रोड़ा नहीं बनते। जिला प्रशासन की इस सकारात्मक पहल की सर्वत्र सराहना हो रही है। राजकुमार और उनकी मां फूल कुमारी ने प्रशासन और समाचार पत्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस मदद से न केवल आवागमन का भारी खर्च और शारीरिक पीड़ा खत्म हुई है, बल्कि राजकुमार के आत्मनिर्भर बनकर आगे पढ़ने के सपनों को भी नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर के माध्यम से शहडोल जिला प्रशासन, सामाजिक न्याय विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों ने जिस गति से इस संवेदनशील मामले का निराकरण किया है, वह सुशासन की एक मिसाल है। जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने के बाद शासन-प्रशासन द्वारा दिखाई गई यह तत्परता दर्शाती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया और प्रशासन जब एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करते हैं, तो पीड़ित से पीड़ित व्यक्ति तक न्याय और योजना का लाभ समय सीमा में पहुंचता है। कलेक्टर और जिले के जिम्मेदार अधिकारियों का यह कदम यह संदेश देता है कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए कटिबद्ध हैं।

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