तुगलकी फरमान से कृषि व्यापार ठप,आक्रोशित व्यापारियों व किसानों का सरकार-प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोल

मंडी बोर्ड के बिना सोचे-समझे फैसले से आदिवासी किसान बेहाल, जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अफसरों की खामोशी पर उठे गंभीर सवाल 


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल द्वारा फार्मगेट ऐप के जरिए उपज बिक्री पर मिलने वाली 2 लाख रुपये तक की नकद भुगतान व्यवस्था को अचानक बंद करने के फैसले ने पूरे शहडोल संभाग के किसान और व्यापारी वर्ग को संकट में डाल दिया है। 13 अगस्त से बिना किसी पूर्व सूचना या जमीनी तैयारी के थोपे गए इस तुगलकी फरमान के कारण स्थानीय मंडियों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। इस अव्यावहारिक निर्णय के विरोध में जिला व्यापारी संघ शहडोल ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए मोर्चा खोल दिया है। संघ ने कृषि उपज मंडी समिति के माध्यम से प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल के नाम तीखा ज्ञापन सौंपा। संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता, महामंत्री प्रकाश ओचानी एवं कोषाध्यक्ष लक्ष्मीचन्द्र बजाज के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में शासन-प्रशासन और मंडी बोर्ड की तानाशाही कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया गया। आदिवासी बाहुल्य शहडोल संभाग की वास्तविक धरातलीय स्थिति को पूरी तरह से नजरअंदाज कर यह ऑनलाइन अनिवार्यता लागू कर दी गई है। दूर-दराज के ग्रामीण व वनांचल इलाकों से आने वाले सीधे-साधे आदिवासी किसान आज भी रोजमर्रा के नकद लेन-देन पर ही आश्रित हैं। 100 प्रतिशत ऑनलाइन भुगतान की मजबूरी के कारण मंडियों में स्थिति बद से बदतर हो चुकी है; कभी सर्वर ठप हो जाता है तो कभी बैंकों का नेटवर्क दगा दे जाता है। आलम यह है कि अपनी ही मेहनत की उपज का पैसा पाने के लिए किसानों को मंडियों में कई-कई दिनों तक भटकना पड़ रहा है और उनका शोषण हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, व्यापारी वर्ग भी दिनभर तकनीकी खामियों से जूझने को मजबूर है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों चाहे वे स्थानीय सांसद हों, विधायक हों या अन्य जिम्मेदार पद पर बैठे अध्यक्ष सभी इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों में भारी जनाक्रोश पनप रहा है। ज्ञापन में क्षेत्र की खस्ताहाल और उपेक्षित व्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए उजागर किया गया कि शहडोल संभाग की 7 प्रमुख कृषि मंडियों में से 5 मंडियां नए वर्गीकरण के तहत आज भी पिछड़ा यानी 'डी' क्लास श्रेणी में आती हैं। इन मंडियों में न तो पर्याप्त प्रांगण हैं और न ही कोई बुनियादी सुविधाएं। ऐसे में किसान और छोटे व्यापारी फार्मगेट ऐप का सहारा लेकर जैसे-तैसे व्यापार संचालित कर रहे थे, लेकिन नकद भुगतान पर पूरी रोक लगने से संभाग का कृषि व्यापार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। जिला व्यापारी संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि किसानों की जमीनी हकीकत और व्यापारिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए फार्मगेट ऐप पर 2 लाख रुपये तक के नकद भुगतान की व्यवस्था अविलंब बहाल की जाए। यदि शासन, जिला प्रशासन और मंडी बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों ने जल्द इस तुगलकी आदेश को वापस नहीं लिया और समस्या का त्वरित समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करते हुए मंडियों में तालाबंदी की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी मंडी बोर्ड प्रशासन एवं मध्य प्रदेश सरकार की होगी।

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