ब्योहारी बीईओ पर भर्ती में धांधली,शासकीय धन के गबन और बदले की कार्रवाई के गंभीर आरोप,सीएम हेल्पलाइन तक पहुंची गूंज
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और भावी पीढ़ी का भविष्य संवारने के सरकारी दावों की हवा खुद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही निकाल रहे हैं। शहडोल जिले के ब्योहारी में पदस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ब्रह्मानंद श्रीवास्तव पर लगे गंभीर आरोपों ने समूचे प्रशासनिक ढांचे और विभागीय कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला सिर्फ एक-दो गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कूट रचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने, चयन प्रक्रिया में भारी धांधली कर अपात्रों को लाभ पहुंचाने, शासकीय राशि का आहरण कर भारी गबन करने और न्यायालयाधीन प्रकरणों के बावजूद कर्मचारियों का उत्पीड़न करने जैसे गंभीर संगीन आरोपों की लंबी फेहरिस्त है। सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे दागदार अधिकारी के खिलाफ अब तक ठोस दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय शासन-प्रशासन मौन साधे क्यों बैठा है? क्या बड़े अधिकारियों की शह पर यह पूरा खेल खेला जा रहा है?
हकदारों का गला घोंटकर अपात्रों पर मेहरबानी
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का सबसे नग्न नाच हाईस्कूल अखेटपुर में अतिथि शिक्षक चयन प्रक्रिया के दौरान देखने को मिला। आरोपों के मुताबिक, चयन परीक्षा में 260 अंक हासिल कर मेरिट लिस्ट में शीर्ष पर रहने वाले योग्य अभ्यर्थी मनीष कुमार नामदेव को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और बीईओ ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए महज 173 अंक पाने वाले अपने ही पुत्र का अवैध रूप से चयन कर लिया। इतना ही नहीं, मॉडल स्कूल खड्डुली में प्राचार्य पद पर रहते हुए बीईओ ने निकिता श्रीवास्तव के नाम से फर्जी तरीके से 'निशुल्क अध्यापन कार्य' का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया। जब वर्तमान प्राचार्य ने संस्था की जावक पंजी, एसएमडीसी बैठक पंजी और उपस्थिति पंजी जैसे शासकीय अभिलेखों की पड़ताल की, तो उसमें संबंधित व्यक्ति का दूर-दूर तक कोई नाम दर्ज ही नहीं मिला। साफ है कि पद का धौंस दिखाकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए, जिसने पूरी चयन प्रणाली की पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दी हैं।
टाइल्स घोटाला,फर्जी बिल और बदले की भावना से वेतन पर रोक
बीईओ की कारगुजारियों का दायरा केवल कागजी फर्जीवाड़े तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी खजाने को चूना लगाने का खेल भी जोरों पर है। मॉडल स्कूल खड्डुली में कंस्ट्रक्शन के नाम पर बिना टाइल्स लगाए ही 75 पेटी टाइल्स का फर्जी बिल पास करवाकर शासकीय राशि आहरित कर ली गई, जबकि धरातल पर टाइल्स का एक टुकड़ा तक नहीं लगा। वहीं दूसरी ओर, प्रशासकीय अधिकारों का दुरुपयोग कर मातहतों को प्रताड़ित किया जा रहा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक बुढ़वा के शिक्षक नरेंद्र प्रसाद मिश्र की नियमित उपस्थिति भेजे जाने के बावजूद उनका वेतन रोक दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि आरोपी बीईओ का पुराना रिकॉर्ड भी दागदार रहा है; पूर्व में बीआरसीसी जयसिंहनगर के पद पर रहते हुए भी उन पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के चलते निलंबन की गाज गिर चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) अतुल चौधरी का कहना है कि आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन जांच के नाम पर खानापूर्ति करता है या दोषियों को सलाखों के पीछे भेजकर मिसाल कायम करता है।
