पार्षद मंच के ज्ञापन से कुछ नहीं होगा जब तक रोड में आंदोलन न होगा-कैलाश तिवारी
Junaid Khan - शहडोल। नगर पालिका कै पार्षदों द्वारा संयुक्त मंच बनाकर कमिश्नर को ज्ञापन सोपा गया है। यह पहली बार है की पार्षद जागृत होकर आम जनता के प्रति सहानुभूति दिखा रहे हैं ।आज 4 वर्षों से नगर पालिका की दुर्दशा हो रही है लेकिन किसी भी पार्टी के पार्षदों की हिम्मत नहीं हुई की वह इस व्यवस्था के मुख्य दोषी नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोला हो। चाहे विपक्षी दल भाजपा हो अथवा कांग्रेस पार्टी। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश तिवारी ने कहा है कि किसी भी नगर पालिका की संचालन के लिए मुख्य रूप से नगर पालिका अध्यक्ष ही जिम्मेदार होता है।नगर पालिका अध्यक्ष के पास सभी प्रकार के अधिकार होते हैं और वह इनका उपयोग करके व्यवस्था को सुधार सकता है लेकिन वर्तमान अध्यक्ष द्वारा जिस ढंग से मनमानी की गई है। वह शहडोल के इतिहास में अविस्मरणीय है। नगर पालिका कार्यालय में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है। इंजीनियर मनमानी कर रहे हैं और दोष कार्य पालन यंत्री ,नगरीय प्रशासन को दिया जा रहा है। बस स्टैंड मार्ग ,सहित जितने निर्माण किए गए हैं उनमें इंजीनियरो द्वारा जिस ढंग से लापरवाही की गई है ।उसका खामियाजा आज नगर को भुगतना पड़ रहा है। पार्षद मंच से अनुरोध है कि वह ज्ञापन से ऊपर जाकर व्यवस्था के मुख्य दोषी के खिलाफ धरना, प्रदर्शन करे नगर की जनता उनके साथ रहेगी।
तकनीकी स्वीकृति की फाइल में त्रुटि का पेंच,39 वार्डों का विकास ठप, शहडोल नपा के पार्षदों ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन
शहडोल। शहडोल नगर पालिका में इन दिनों विकास का पहिया घोंघे की रफ्तार से भी धीमा चल रहा है, और इसका जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि संभागीय कार्यालय में बैठे अफसरों की वो लाल कलम है, जो हर फाइल में कोई न कोई त्रुटि निकालकर उसे कागजों के ढेर में वापस दबा देती है। पिछले दो सालों से नगर के सभी 39 वार्डों के पार्षद अपने-अपने इलाके में रोड, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। आखिर में सब्र का बांध टूटा तो संयुक्त पार्षद मंच के बैनर तले तमाम पार्षदों ने एकजुट होकर संभागायुक्त की चौखट पर जाकर ज्ञापन का पुलिंदा सौंप दिया। 2 साल से फाइलों का पिंग-पॉन्ग खेल। पार्षदों का सीधा आरोप है कि जब भी वार्ड की जनता के लिए रोड, नाली या पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रस्ताव नगर पालिका स्तर से मंजूर होकर तकनीकी स्वीकृति के लिए कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास संभागीय कार्यालय भेजा जाता है, तो वहां बैठे जिम्मेदार अफसर कोई न कोई कमी या त्रुटि का बहाना बनाकर फाइलों को वापस लौटा देते हैं। पिछले 2 वर्षों से फाइलों का यह पिंग-पॉन्ग खेल बदस्तूर जारी है। निकाय दफ्तर से फाइल ईई दफ्तर जाती है और वहां से तकनीकी पेंच फंसाकर वापस नगर पालिका भेज दी जाती है। इस चक्कर में 39 वार्डों का विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़ा है और जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी ही नगर सरकार में उपेक्षित और लाचार महसूस कर रहे हैं।
1 साल में 3 सीएमओ और 2 ईई बदले! शहडोल नगर पालिका में प्रशासनिक स्थिरता की क्या स्थिति है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते एक साल में यहां 3-3 मुख्य नगर पालिका अधिकारी बदले जा चुके हैं। संभागीय कार्यालय का हाल तो और भी हास्यास्पद है, यहां कार्यपालन यंत्री के 02 पद स्वीकृत हैं, लेकिन काम सिर्फ 01 ही अफसर के भरोसे चल रहा है। इस एक साल में यहां भी 2 बार कार्यपालन यंत्री बदले जा चुके हैं। जब दफ्तरों में अफसरों का आना-जाना ही लगा रहेगा, तो विकास की फाइलों पर दस्तखत कौन करेगा? इस तबादला उद्योग का खामियाजा सीधे तौर पर शहडोल की आम जनता भुगत रही है। बुढ़ार चौक से न्यू बस स्टैंड रोड बेहाल। संयुक्त पार्षद मंच ने अपने शिकायती पत्र में नगर की दो प्रमुख और विकराल समस्याओं पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कराया है। बुढ़ार चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग: इस बेहद व्यस्त मार्ग के निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सडक़ की खस्ताहाली और धूल-गड्ढों से जनता का गुस्सा दिन-ब-दिन फूट रहा है। सीवर परियोजना का कोराम: पिछले 2 सालों से शहडोल शहर में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर पूरे शहर को खोदकर छोड़ दिया गया है। सीवर कंपनी अपनी मर्जी से जहां चाहे खुदाई कर देती है, न कोई समयसीमा है और न ही वार्ड पार्षदों को इसकी कोई पूर्व सूचना दी जाती है। जनता रोज दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है और ठेकेदार बेफिक्र घूम रहा है।
अव्यवस्था सुधारो, वरना होगा आंदोलन शहडोल के सभी वार्ड पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि यदि तकनीकी स्वीकृतियों में अनावश्यक देरी का यह सिलसिला तुरंत बंद नहीं हुआ और सीवर कंपनी की मनमानी पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनप्रतिनिधि खामोश नहीं बैठेंगे। अब देखना यह होगा कि संभागायुक्त के हस्तक्षेप के बाद संभागीय कार्यालय के कार्यपालन यंत्री और नगर पालिका प्रशासन की नींद टूटती है या फिर 39 वार्डों का विकास यूं ही फाइलों के पन्नों में दम तोड़ता रहेगा।

