ओबी स्लाइड होने से बड़ी दुर्घटना हुई तो जय अम्बे प्रबंधन होगा जिम्मेदार ग्रामीण

रामपुर बटुरा-खाड़ा के विस्थापितों व प्रभावितों ने उठाए सुरक्षा,सड़क और रोजगार को लेकर गंभीर सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने कहा समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा



Junaid Khan - शहडोल। रामपुर बटुरा खाड़ा। एसईसीएल के रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में ओवरबर्डन (ओबी) हटाने का कार्य कर रही जय अम्बे कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, विस्थापितों और प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने ओबी डंपिंग, सड़क की स्थिति, भारी वाहनों की तेज रफ्तार तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने भी ग्रामीणों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए संबंधित प्रबंधन से तत्काल समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि नवंबर-दिसंबर 2025 के आसपास जब जय अम्बे कंपनी रामपुर बटुरा क्षेत्र में पहुंची थी, उस समय विस्थापितों और प्रभावित परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने का भरोसा दिलाया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनकी जमीन और क्षेत्र से जुड़े होने के कारण कंपनी में उन्हें प्राथमिकता मिलेगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कार्य शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में बाहरी लोगों की नियुक्तियां होने लगीं और स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए लगातार इंतजार करना पड़ा।

ओबी डंपिंग से गांव की सुरक्षा पर सवाल

विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप ओबी डंपिंग को लेकर है। उनका कहना है कि गांव के आसपास और सड़क किनारे काफी ऊंचाई तक ओबी डंप किया जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि भारी बारिश के दौरान ओबी का बड़ा हिस्सा स्लाइड हुआ तो आसपास के लोगों और आवागमन करने वाले वाहनों को गंभीर खतरा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ओबी स्लाइड होने से कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध पुलिस में शिकायत और एफआईआर की मांग की जाएगी। ग्रामीणों ने विशेष रूप से जय अम्बे प्रबंधन से जुड़े रिंटू सिंह और जोगिंदर सिंह की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है।

सड़क काटकर डंपिंग किए जाने का आरोप

ग्रामीणों ने खाड़ा से खोलगड़ी तक सड़क की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले से ही आवागमन की समस्या है और ग्रामीणों के आवागमन के लिए उपयोग की जाने वाली सड़क के किनारे तथा आसपास ओबी डंपिंग किए जाने से परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर सड़क के स्वरूप को प्रभावित करते हुए डंपिंग कर दी गई है, जिससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि खनन परियोजना के कारण यदि ग्रामीणों की सड़क प्रभावित होती है तो कंपनी और संबंधित प्रबंधन को वैकल्पिक एवं सुरक्षित सड़क की व्यवस्था करनी चाहिए।

रामपुर से बुढार तक तेज रफ्तार भारी वाहनों से दहशत

ग्रामीणों ने रामपुर से बुढार तक चलने वाले जय अम्बे के भारी वाहनों की रफ्तार पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार भारी वाहन क्षेत्र की सड़कों से गुजरते हैं और कई बार तेज गति से चलने के कारण पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भारी वाहनों की गति निर्धारित की जाए तथा स्कूल, बाजार, आबादी वाले क्षेत्रों और गांवों से गुजरते समय विशेष सावधानी बरती जाए। सड़क सुरक्षा को लेकर कंपनी प्रबंधन और एसईसीएल को संयुक्त रूप से निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

रोजगार के नाम पर स्थानीय लोगों को छलावा?

विस्थापितों का कहना है कि कंपनी के आने के समय स्थानीय लोगों को रोजगार देने की उम्मीद बंधी थी। लेकिन करीब दस महीने काम करने के बाद भी बड़ी संख्या में स्थानीय बेरोजगार रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय युवाओं में निराशा बढ़ रही है। कुछ ग्रामीणों ने बाहरी कर्मचारियों की भर्ती में पैसे के लेन-देन और वेतन से कमीशन लिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कंपनी प्रबंधन का पक्ष इस संबंध में सामने आना आवश्यक है।

बिना काम के वेतन देने का भी आरोप

ग्रामीणों ने जय अम्बे कंपनी में कुछ ऐसे लोगों को कर्मचारी सूची में शामिल किए जाने का भी आरोप लगाया है, जो उनके अनुसार नियमित रूप से काम नहीं करते, लेकिन उनकी उपस्थिति दर्ज कर वेतन भुगतान किए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि एसईसीएल और कंपनी प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की उपस्थिति, नियुक्ति प्रक्रिया और वेतन भुगतान की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

श्रमिकों के वेतन का मामला भी उठा

ग्रामीणों के साथ-साथ कंपनी में काम करने वाले श्रमिकों से जुड़ी शिकायतें भी सामने आने की बात कही गई है। ग्रामीणों का दावा है कि 30 से अधिक कर्मचारियों के कई महीनों के वेतन भुगतान को लेकर शिकायतें एसईसीएल प्रबंधन तक पहुंची हैं। कर्मचारियों पर काम का दबाव बनाने और समस्याओं का समय पर समाधान नहीं करने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजना में काम करने वाले श्रमिकों को समय पर वेतन मिलना उनका अधिकार है। इस मामले में भी एसईसीएल को शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

एसईसीएल प्रबंधन को देंगे सामूहिक शिकायत

विस्थापितों और प्रभावित परिवारों ने अब मामले को लिखित रूप से एसईसीएल प्रबंधन के सामने रखने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों के अनुसार जल्द ही एक सामूहिक शिकायती पत्र सौंपकर ओबी डंपिंग, सड़क, भारी वाहनों की रफ्तार और रोजगार सहित सभी समस्याओं का समाधान करने की मांग की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने और डंपिंग कार्य के विरोध में मोर्चा खोलने पर मजबूर होंगे। उनका कहना है कि किसी भी संभावित नुकसान की स्थिति में कंपनी प्रबंधन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि विकास और खनन परियोजना के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों की शिकायतों को केवल मौखिक आश्वासन तक सीमित रखने के बजाय लिखित रूप से समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओबी डंपिंग की तकनीकी सुरक्षा, ग्रामीण सड़कों की स्थिति और भारी वाहनों की गति की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही स्थानीय विस्थापितों एवं प्रभावित परिवारों को रोजगार में प्राथमिकता देने की नीति को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें विकास से आपत्ति नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर उनकी सुरक्षा, सड़क, जमीन और रोजगार के अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि एसईसीएल प्रबंधन और जय अम्बे कंपनी ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं।

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