शहडोल-उमरिया बाईपास मार्ग पर मुड़ना नदी के पुल का कंक्रीट टूटकर नदी में गिरा,डेढ़ साल पहले भी हुआ था ऐसा ही हादसा, बेपरवाह अफ़सरों के साये में मंडरा रहा बड़ा खतरा
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश में विकास के दावों और सरकारी खजाने से बनने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। शहडोल-उमरिया बाईपास मार्ग पर मुड़ना नदी के ऊपर लगभग ढाई करोड़ रुपये (₹2.5 करोड़) की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया पुल लोकार्पण से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिख रहा है। शनिवार सुबह अचानक पुल के बीचों-बीच ढलाई का एक बड़ा कंक्रीट का हिस्सा टूटकर नीचे नदी में समा गया, जिससे पुल में एक विशाल और भयावह सुराख (होल) बन गया। जिस पुल से जल्द ही आम जनता और भारी वाहनों का विधिवत आवागमन शुरू होना था, वह अपनी पहली परीक्षा में ही पूरी तरह फेल साबित हुआ है। घटिया निर्माण सामग्री, तकनीकी लापरवाही और ठेकेदार-अधिकारियों की मिलीभगत से बने इस पुल ने शासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।
जिम्मेदार अफ़सरों की शह पर सुस्त रवैया,पहले भी धंस चुका है हिस्सा
स्थानीय निवासियों और राहगीरों में इस घटना को लेकर भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों के अनुसार, महज डेढ़ वर्ष पूर्व भी इस पुल के दूसरे हिस्से में ठीक इसी प्रकार का बड़ा गड्ढा और कंक्रीट टूटने की घटना सामने आई थी। उस समय भी लोक निर्माण विभाग और संबंधित तकनीकी अधिकारियों ने मामले की लीपापोती करते हुए केवल पैचवर्क का काम कराकर इतिश्री कर ली थी। बार-बार पुल के धंसने और निर्माण कार्य के खोखलेपन से स्पष्ट है कि निर्माण एजेंसी और लोक निर्माण/सेतु निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने भ्रष्टाचार की नीयत से गुणवत्ता मानकों को ताक पर रख दिया था। जनता के खून-पसीने की कमाई के ढाई करोड़ रुपये पानी में बहा दिए गए, लेकिन जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। कमीशनखोरी के इस खेल में आखिरकार आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया गया है।
अधिकारियों की चुप्पी और हादसों को न्योता देता बाईपास मार्ग
हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग ने भले ही कागजों में इस मार्ग को आधिकारिक रूप से हरी झंडी न दी हो, लेकिन मौके पर किसी तरह की ठोस बैरिकेडिंग या सुरक्षा के इंतज़ाम न होने के कारण यहाँ से लगातार छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही जारी है। पुल के जर्जर और खोखले हिस्से पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा घटित हो सकता है। प्रशासन और विभागीय अफ़सरों की इस आपराधिक लापरवाही को देखते हुए स्थानीय लोगों को खुद आगे आना पड़ा और उन्होंने खतरे वाले स्थान पर झाड़ियां व सांकेतिक बोर्ड लगाकर वाहन चालकों को सचेत करने का काम किया। इस पूरे मामले में सेतु निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE), एसडीओ (SDO) और संबंधित ठेकेदार पर आपराधिक मामला दर्ज करने तथा उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच की मांग जोर पकड़ रही है। अब देखना यह होगा कि शासन इस भ्रष्टाचार के जिम्मेदार सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई करता है या हर बार की तरह फाइलें दबा दी जाएंगी।
