चुहरी स्कूल बना गुटबाजी और अखाड़े का केंद्र, मध्याह्न में खूनी संघर्ष,दो छात्रों के सिर फूटे

कागजी नोटिस तक सीमित जिम्मेदार,प्रशासन और शिक्षा विभाग की लापरवाही से पनप रही बड़ी वारदात की आशंका


Junaid Khan - शहडोल। जिले के गोहपारू जनपद अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुहरी में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। ज्ञान के मंदिर के रूप में पहचाने जाने वाले इस विद्यालय परिसर में पढ़ाई-लिखाई दरकिनार हो चुकी है और यहाँ छात्रों के बीच आए दिन होने वाली गुटबाजी, गाली-गलौज तथा खूनी संघर्ष आम बात बन गई है। सोमवार को मध्यावकाश के दौरान कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों के बीच किसी बात को लेकर जमकर हाथापाई व लात-घूंसे चले। देखते ही देखते विवाद इतना भीषण हो गया कि दो छात्रों का सिर फट गया और स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; पूर्व में भी कई बार ऐसी हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे हैं। अधिकारियों की सरपरस्ती और कागजी कार्रवाई का खेल मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू स्कूल प्रशासन और जिम्मेदार शिक्षा अधिकारियों का रवैया है। पूर्व में हुई घटनाओं के बाद विद्यालय प्रबंधन ने उपद्रवी छात्रों को महज औपचारिक 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी। सवाल उठता है कि जब बार-बार वही स्थिति निर्मित हो रही है, तो नोटिस जारी करने के बाद आगे की कड़ी अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की यह आपराधिक अनदेखी स्पष्ट दर्शाती है कि उन्हें बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के माहौल से कोई सरोकार नहीं है। कागजी नोटिस का भय उपद्रवी तत्वों में खत्म हो चुका है और जिम्मेदार अधिकारी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है? वर्तमान में चुहरी स्कूल में व्याप्त भय और असुरक्षा के माहौल के कारण आम छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक बेहद सहमे हुए हैं। यदि समय रहते जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने मामले में सीधा हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह छात्र गुटबाजी किसी दिन गंभीर आपराधिक या जानलेवा वारदात का रूप ले सकती है। केवल खानापूर्ति करने वाले प्राचार्यों और शिक्षकों की जवाबदेही तय करने के बजाय विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। अब समय केवल नोटिस देने का नहीं, बल्कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, नियमित पुलिस गश्त, शिक्षकों की जवाबदेही तय करने और हिंसक प्रवृत्ति वाले छात्रों की सख्त काउंसलिंग व अनुशासनात्मक कार्रवाई का है। देखना यह होगा कि इस तीखी खबर के बाद नींद में सोया प्रशासन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है।

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