जिला चिकित्सालय शहडोल के एसएनसीयू में 870 ग्राम की नवजात बच्ची को मिला नया जीवन

58 दिनों तक चला उपचार, वेंटिलेटर के बिना सीपीएपी मशीन की मदद से बचाई जान, एक माह बाद फॉलोअप में वजन बढ़कर हुआ 1 किलो 700 ग्राम


Junaid khan - शहडोल। 13 अक्टूबर 2026- जिला चिकित्सालय शहडोल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ के समर्पित प्रयासों से मात्र 870 ग्राम वजन की समय से पहले जन्मी नवजात बच्ची को नया जीवन मिला है। सात माह की गर्भावस्था में जन्मी इस बच्ची की स्थिति जन्म के समय अत्यंत गंभीर थी। एसएनसीयू में 58 दिनों तक चले उपचार, निरंतर निगरानी और विशेष देखभाल के बाद बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार हुआ। डिस्चार्ज होने के एक माह बाद 12 अक्टूबर को फॉलोअप के दौरान बच्ची का वजन बढ़कर 1 किलो 700 ग्राम पाया गया। बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार से उसके माता-पिता बेहद खुश हैं और उन्होंने चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया है। गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय पहुंची थी नवजात। जयसिंहनगर तहसील के ग्राम बाराछ निवासी श्रीमती स्वरूपा सेन, पति श्री सूरज सेन को 15 जुलाई को सिविल अस्पताल ब्यौहारी से जिला चिकित्सालय शहडोल रेफर किया गया था। गर्भावस्था के सातवें माह में ही जिला चिकित्सालय पहुंचने के एक घंटे के भीतर बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के समय बच्ची का वजन मात्र 870 ग्राम था। बच्ची को सांस लेने में परेशानी हो रही थी, वह ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी और उसके हृदय की धड़कनें भी कमजोर थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे तत्काल एसएनसीयू में भर्ती कर सीपीएपी मशीन के माध्यम से सांस लेने में सहायता दी गई।सर्फेक्टेंट दवा और विशेष उपचार से मिली राहत। चिकित्सकों ने जांच के दौरान बच्ची के फेफड़ों के अपरिपक्व होने के कारण होने वाली समस्या हायलिन मेम्ब्रेन डिजीज (एचएमडी) के लक्षणों को देखते हुए फेफड़ों को फैलने में मदद करने वाली सर्फेक्टेंट दवा दी। इसके साथ ही अन्य जीवनरक्षक दवाएं शुरू की गईं। बच्ची की गंभीर स्थिति के बारे में परिजनों को संवेदनशीलता के साथ समझाया गया और उपचार की प्रक्रिया लगातार जारी रखी गई। 58 दिनों तक चला उपचार, चार बार गंभीर हुई स्थिति। एसएनसीयू में बच्ची का उपचार 58 दिनों तक चला। इस दौरान उसके स्वास्थ्य में कई बार उतार-चढ़ाव आए। चार बार बच्ची की स्थिति अत्यंत गंभीर हुई, लेकिन चिकित्सकों की तत्परता और नर्सिंग स्टाफ की सतत मेहनत से हर बार उसे गंभीर स्थिति से बाहर निकालने में सफलता मिली। उपचार के दौरान बच्ची के रक्त में बार-बार कमी आने के कारण चार बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ी। बच्ची की सांस रुकने, गले में दूध फंसने और संक्रमण से बचाव जैसी गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लगातार निगरानी की गई। बच्ची को 30 दिनों तक सीपीएपी मशीन के माध्यम से सांस लेने में सहायता दी गई। विशेष बात यह रही कि वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता के बिना ही सीपीएपी मशीन की मदद से बच्ची का उपचार सफलतापूर्वक किया गया। कंगारू मदर केयर से बच्ची के स्वास्थ्य में हुआ सुधार। बच्ची के उपचार के तीसरे दिन से ही कंगारू मदर केयर (केएमसी) शुरू किया गया। चिकित्सकों एवं नर्सों के मार्गदर्शन में बच्ची की मां को केएमसी का प्रशिक्षण दिया गया। मां ने नियमित रूप से कंगारू मदर केयर अपनाते हुए बच्ची की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की देखभाल में केएमसी उपयोगी माना जाता है।फॉलोअप में वजन बढ़कर हुआ 1 किलो 700 ग्राम। लगातार 58 दिनों तक उपचार और देखभाल के बाद बच्ची का वजन बढ़ने लगा और परिजनों की सहमति से उसे एसएनसीयू से डिस्चार्ज किया गया। डिस्चार्ज के समय बच्ची को सात दिन बाद प्रथम फॉलोअप के लिए बुलाया गया, जिसमें उसका वजन लगातार बढ़ता हुआ पाया गया। इसके बाद 12 अक्टूबर को डिस्चार्ज के एक माह बाद हुए फॉलोअप में बच्ची का वजन 1 किलो 700 ग्राम दर्ज किया गया। चिकित्सकीय जांच के दौरान बच्ची का वजन अच्छी तरह बढ़ता पाया गया और वह स्वस्थ थी। बच्ची के स्वास्थ्य में आए सुधार से माता-पिता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उपचार में जुटे डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को धन्यवाद दिया। चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की रही महत्वपूर्ण भूमिका। इस चुनौतीपूर्ण उपचार में एसएनसीयू प्रभारी डॉ. सुनील कुमार हथगेल, डॉ. सुप्रिया, डॉ. कृष्णेंद्र, डॉ. बृजेश पटेल, नर्सिंग इंचार्ज एवं नर्सिंग ऑफिसर अपर्णा सिंह सहित समस्त नर्सिंग अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा तथा जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ के नेतृत्व में एसएनसीयू की इस उपलब्धि ने नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल, चिकित्सकीय तत्परता और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को रेखांकित किया है।

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