वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आईजी,कलेक्टर और विधायक की उपस्थिति में हुआ पूजन, डीआईजी की राइफल मिसफायर होने के बाद एसपी-एएसपी ने रस्म की पूरी
Junaid Khan - शहडोल। विजयादशमी के पावन पर्व पर पुलिस विभाग की परंपरा के अनुसार शहडोल के रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) में गरिमामय एवं भव्य माहौल के बीच वार्षिक शस्त्र पूजन समारोह का आयोजन किया गया। धार्मिक रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में क्षेत्र की सुख, शांति, समृद्धि और सुदृढ़ कानून व्यवस्था बनाए रखने की कामना की गई। समारोह में प्रशासनिक और जन प्रतिनिधियों की गरिमामयी मौजूदगी रही, जिसमें विधायक मनीषा सिंह, आईजी एन. चैत्रा, कलेक्टर पार्थ जायसवाल तथा एसपी डॉ. संजय अग्रवाल सहित तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी विशेष रूप से शामिल हुए। पुलिस बल ने पूरे अनुशासन के साथ अपने शस्त्रों और वाहनों का विधि-विधान से पूजन कर विभाग के गौरवशाली इतिहास को नमन किया। हालांकि, धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होने के उपरांत आयोजित होने वाली पारंपरिक 'हर्ष फायर' (फायरिंग रस्म) के दौरान मैदान में उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई, जब शहडोल रेंज के डीआईजी विवेक सिंह की राइफल एन मौके पर दगा दे गई। जैसे ही डीआईजी ने हर्ष फायर के लिए राइफल का ट्रिगर दबाया, उसमें से गोली चलने के बजाय केवल 'क्लिक' की आवाज आई। दोबारा प्रयास करने पर भी जब फायर नहीं हुआ, तो मौके पर मौजूद अधिकारियों में खलबली मच गई। स्थिति को संभालते हुए तुरंत दूसरी राइफल का प्रबंध किया गया, जिसके बाद एसपी डॉ. संजय अग्रवाल और एएसपी ने फायरिंग कर शस्त्र पूजन की पारंपरिक रस्म को निष्ठापूर्वक पूर्ण कराया।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग के शस्त्रागार प्रबंधन और रखरखाव पर सवाल उठने लगे हैं। कानून-व्यवस्था के जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों के हाथों में ही एन वक्त पर हथियार का मिसफायर होना पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर प्रशासनिक दृष्टिकोण से मंथन का विषय बन गया है। जहां एक ओर आमजन और जानकारों द्वारा नियमित शस्त्र जांच पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों ने मामले को शांत करते हुए इसे महज एक सामान्य तकनीकी व्यवधान बताया है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक रखे रहने या कारतूस में आई तात्कालिक तकनीकी खराबी के कारण कभी-कभार ऐसी स्थिति बन जाती है, जिसे किसी गंभीर लापरवाही या बड़ी चूक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
