कमीशन में कटौती और उपेक्षा से बिफरे राशन विक्रेता,सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ खोला मोर्चा

कमीशन में कटौती और उपेक्षा से बिफरे राशन विक्रेता,सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ खोला मोर्चा


Junaid Khan - शहडोल। (मध्य प्रदेश) प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की रीढ़ माने जाने वाले शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालक अब सरकार और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार अनदेखी से तंग आ चुके हैं। अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर मध्य प्रदेश राशन विक्रेता संघ एवं जनकल्याण संघ (शाखा शहडोल) के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपते हुए विक्रेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी ज्वलंत समस्याओं और कमीशन में वृद्धि को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरे प्रदेश में खाद्य वितरण व्यवस्था ठप हो सकती है, जिसकी पूरी जवाबदेही खाद्य विभाग के उच्च अधिकारियों और प्रदेश सरकार की होगी। राशन विक्रेताओं का यह संघर्ष केवल अपने हक की लड़ाई नहीं है, बल्कि प्रशासनिक हठधर्मिता और व्यवस्था की कमियों को उजागर करने वाला एक सशक्त कदम है।

अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में सबसे कम कमीशन,भुखमरी की कगार पर विक्रेता परिवार

राशन विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में आंकड़ों के साथ सरकार और विभागीय अधिकारियों की पोल खोलकर रख दी। संघ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश भर में संचालित करीब 28 हजार शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालक रात-दिन मेहनत करके गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचा रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि बढ़ती बेतहाशा महंगाई के दौर में भी उन्हें बेहद मामूली कमीशन पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और दुकान संचालन का गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए संघ ने बताया कि जहां बिहार में ₹258, केरल में ₹270, हरियाणा में ₹200, दिल्ली में ₹200, उत्तराखंड में ₹195, महाराष्ट्र में ₹170 और उत्तर प्रदेश में ₹125 प्रति क्विंटल कमीशन दिया जा रहा है, वहीं मध्य प्रदेश सरकार और खाद्य विभाग विक्रेताओं का आर्थिक शोषण करने पर आमादा है। इस भीषण विषमता को लेकर विक्रेताओं में प्रशासन और सरकार के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।

जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

कमिशन बढ़ाने सहित अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने वाले संघ के समर्पित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के इस जुझारू प्रयास की सर्वत्र सराहना हो रही है। विपरीत परिस्थितियों में भी जनता की सेवा करने वाले इन दुकान संचालकों के हक के लिए आवाज उठाना उनके अदम्य साहस को दर्शाता है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और खाद्य आपूर्ति विभाग की चुप्पी यह दर्शाती है कि शासन-प्रशासन धरातल की जमीनी समस्याओं से कितना बेखबर है। बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समाधान न निकालना प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा है। राशन विक्रेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि 5 सूत्रीय मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और हड़ताल करने को बाध्य होंगे।

Previous Post Next Post