सौंदर्यीकरण के विवादों के बीच अब फायर ब्रिगेड के दुरूपयोग से सुलग रहे सवाल, जिम्मेदारों की अनदेखी और लापरवाही उजागर
Junaid khan - शहडोल। आपदा और आगजनी की आपातकालीन परिस्थितियों में आमजन के जान-माल की हिफाजत करने वाली दमकल गाड़ियों का इस्तेमाल यदि धुलाई और सिंचाई जैसे मामूली कार्यों में होने लगे, तो प्रशासनिक व्यवस्था और उसकी नीयत पर गंभीर सवाल उठना तय है। शहडोल संभाग के अंतर्गत आने वाली धनपुरी नगरपालिका क्षेत्र में ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स परिसर में फर्श की धुलाई और पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए आपातकालीन फायर ब्रिगेड वाहन को झोंक दिया गया है। गौरतलब है कि इस कॉम्प्लेक्स में जारी सौंदर्यीकरण का कार्य पहले से ही अनियमितताओं और विवादों के घेरे में रहा है। ऐसे में आग बुझाने के लिए चौबीसों घंटे मुस्तैद रहने वाली दमकल गाड़ी का इस्तेमाल फर्श चमकाने में किया जाना नगरपालिका की गंभीर ढिलाई और बेपरवाही को उजागर करता है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि इस दौरान क्षेत्र में कोई भीषण आगजनी की घटना घटित हो जाती, तो इस लापरवाही का खामियाजा किसे भुगतना पड़ता ? जीवनरक्षक संसाधनों के इस खुलेआम दुरुपयोग ने स्थानीय प्रशासन और सरकार के सुशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। नियमानुसार फायर ब्रिगेड वाहनों को हर क्षण आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार और सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य है, ताकि समय रहते हादसों पर काबू पाया जा सके। लेकिन धनपुरी में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अपनी मनमर्जी से इन वाहनों को सामान्य धुलाई-सफाई के कामों में खपा रहे हैं। यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या इस गैर-जिम्मेदाराना काम के लिए सक्षम उच्च अधिकारियों से विधिवत अनुमति ली गई थी, या फिर नगर पालिका के अधीनस्थ कर्मचारी अपनी मर्जी से जीवनरक्षक वाहनों का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं? इसके अलावा यह भी बड़ा सवाल है कि क्या नगरपालिका के पास सफाई और पौधों की सिंचाई के लिए अन्य वैकल्पिक संसाधन या टैंकर उपलब्ध नहीं हैं, जो आपातकालीन संसाधनों की बलि चढ़ाई जा रही है? पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों का रवैया भी बेहद निराशाजनक और टालमटोल वाला नजर आ रहा है। इस गंभीर लापरवाही और आपातकालीन वाहन के दुरुपयोग के संबंध में जब धनपुरी नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) अमित तिवारी से सीधी बात की गई, तो उन्होंने अपनी अनभिज्ञता जाहिर करते हुए केवल इतना कहा कि "मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं है, मामले को दिखाता हूं"। जिम्मेदार अधिकारी का यह उदासीन बयान यह बताने के लिए काफी है कि निकाय के भीतर निचले स्तर पर किस कदर अनुशासनहीनता और अव्यवस्था का बोलबाला है। क्षेत्र की जनता अब इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शासन-प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों पर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रही है।
