बेखौफ चोरों का तांडव,सिंहपुर में रात तो ब्योहारी में दिनदहाड़े दुस्साहस, क्या सो रहा है पुलिस-प्रशासन?

कहीं रात में सेंधमारी तो कहीं दोपहर में अलमारी के ताले टूटे, गश्त-सुरक्षा के दावों की खुली पोल


Junaid khan - शहडोल। जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है और बेखौफ अपराधियों के बुलंद हौसलों के आगे पुलिस-प्रशासन पूरी तरह लाचार साबित हो रहा है। सिंहपुर से लेकर ब्योहारी तक चोरों ने जिस निर्भीकता के साथ चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है, उसने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक, अपराधियों को न तो खाकी का खौफ है और न ही कानून का डर। हालात यह हैं कि आम जनता अपने ही घरों में खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और जिम्मेदार अधिकारी महज़ कागजी खानापूर्ति और 'मामला दर्ज कर जांच जारी है' की रटी-रटाई पटकथा तक सीमित होकर रह गए हैं। पहली घटना सिंहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम उधिया की है, जहाँ चोरों ने पुलिस की रात्रिकालीन गश्त पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया। 6 अक्टूबर की रात 11 बजे से 7 अक्टूबर की सुबह 4 बजे के बीच अज्ञात चोरों ने बृजेश कुमार यादव (37) के मकान को निशाना बनाया। चोर दरवाजे का ताला तोड़कर बेधड़क अंदर घुसे और पेटी खंगालते हुए उसमें रखी चांदी की करधन, तीन जोड़ी पायल, पायजेब, सोने का मंगलसूत्र, दो लॉकेट और 35 हजार रुपये नकद समेट ले गए। चोर इतने इत्मीनान से आए थे कि घर में रखी गृहस्थी की चीज़ें—5 किलो घी, गुटखे के दो पैकेट, सिगरेट के दो पैकेट और तंबाकू का पैकेट भी उठाकर ले गए। चोरी की यह शैली दर्शाती है कि इलाके में चोरों को पुलिस का बिल्कुल भी भय नहीं है।

दूसरा मामला ब्योहारी के पटेल नगर का है, जिसने पुलिस प्रशासन की सतर्कता पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ चोरों ने किसी रात के अंधेरे का इंतज़ार भी नहीं किया, बल्कि 4 अक्टूबर की दोपहर करीब 2 बजे दिनदहाड़े धावा बोला। पटेल नगर निवासी राकेश कुमार पटेल (45) के घर में घुसकर अज्ञात आरोपी ने अलमारी का ताला तोड़ा और उसमें रखे करीब 85 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के पुराने गहने और नकदी पार कर दिए। दिन के उजाले में घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह ताला तोड़कर की गई चोरी ने साफ कर दिया है कि पुलिस का खौफ अपराधियों के दिल से पूरी तरह गायब हो चुका है। जब क्षेत्र में लगातार इस प्रकार की वारदातें हो रही हैं, तब क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों की निष्क्रियता पर सवाल उठना लाज़मी है। जनता पूछ रही है कि आखिर रात्रिकालीन गश्त के नाम पर पुलिस बल कहाँ तैनात रहता है? क्या अधिकारियों की जवाबदेही केवल घटना के बाद खानापूर्ति करने तक ही सीमित है? अगर समय रहते गश्त और संदिग्धों पर निगरानी बढ़ा दी गई होती, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद न होते। क्षेत्रीय निवासियों ने वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन से मांग की है कि मामले में तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए गश्त दुरुस्त की जाए और जल्द से जल्द चोरी का माल बरामद कर चोरों को जेल के सलाखों के पीछे भेजा जाए, अन्यथा जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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