बाजार क्षेत्र में भालू का मूवमेंट, सीसीटीवी में कैद, दहशत में ग्रामीण-जैतपुर वन परिक्षेत्र के रसमोहनी का मामला
Junaid khan - शहडोल। जैतपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत रसमोहनी क्षेत्र में इन दिनों भालू के बढ़ते मूवमेंट के चलते ग्रामीण दहशत में हैं। बीती रात्रि रसमोहनी के बाजार क्षेत्र में स्थित एक किराना स्टोर में लगे सीसीटीवी कैमरे में एक भालू विचरण करते देखा गया। इसके बाद आसपास के गांवों में भय का वातावरण निर्मित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग वन्यजीवों के रिहायसी क्षेत्र में बढ़ते मूवमेंट को गंभीरता से नहीं ले रहा है। सीसीटीवी फुटेज में भालू को बाजार के मुख्य मार्ग पर घूमते देखा गया। इसके बाद व्यापारी व देर शाम काम कर लौटने वाले सतर्कता बरत रहे हैं। व्यापारियों ने रात में दुकान बंद करने के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ सप्ताह से रसमोहनी, खैरहनी और आसपास के क्षेत्रों में भालू को कई बार देखा गया है। इसके बाद भी वन विभाग ने न कोई चेतावनी जारी की है और न ही अन्य कोई सावधानी बरती जा रही है।
पूर्व में घट चुकी घटना,कोई प्रभावी कदम नहीं
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक वर्ष में भालू के हमलों में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग। 1. प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल भालू संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया जाए। 2. रात के समय वन सुरक्षा गश्ती दल तैनात किए जाएं। 3. विशेषज्ञ वन्यजीव बचाव दल को बुलाकर भालू को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाया जाए। 4. गांवों में जागरूकता कार्यक्रम, सुरक्षा दिशानिर्देश और त्वरित सूचना तंत्र विकसित किया जाए। 5. भालू हमले के पीड़ितों को शीघ्र और पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। और कुछ घटनाओं में जनहानि भी हुई है। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से कोई दीर्घकालिक रणनीति नहीं अपनाई गई। अभी तक न तो निगरानी दल सक्रिय किया गया और न ही कोई विशेष टीम भेजी गई। जानकारों की कहना है कि रिहायसी क्षेत्रों में वन्यजीवों का मूवमेंट बढ़ना चिंता का विषय है। वनक्षेत्र में वन्यजीवों के लिए खाद्य संकट, अतिक्रमण व उनके रहवास में मानवीय खलल के कारण हो रहा है। इससे वन्यजीव मानव द्वंद्व की संभावनाओं को बल मिल रहा है। रसमोहनी और जैतपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि भालू की जानकारी विभाग को कई बार फोन पर दी गई, लेकिन वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती ही नहीं, पहुंचती भी हैं तो काफी देर से।
