जयसिंहनगर अस्पताल में मनमानी से जरूरतमंदों को इलाज में असुविधा
Junaid khan - शहडोल। अस्पताल हमारा है, हम अपने मन से काम करेंगे, कुछ ऐसी ही हालत जयसिंहनगर सिविल अस्पताल की हो गई है। लापरवाही इस हद तक बढ़ गई है कि यहां का पर्ची काउंटर समय पर नहीं खुलता है, जिससे गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों व उनके स्वजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीज सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंच जाते हैं और ओपीडी में ड्यूटी डाक्टर भी पहुंचे जाते है, लेकिन पर्ची नहीं कट पाने के कारण इलाज में देरी हो जाती है। बुधवार की सुबह लगभग आठ माह का मासूम बच्चा गंभीर हालत में जयसिंहनगर सिविल अस्पताल लाया गया। जयसिंहनगर से करीब 10 किलोमीटर दूर से स्वजन अपने आठ माह के बेटे आरव अहिरवार को लेकर सुबह करीब नौ बजे अस्पताल पहुंच गए थे। उस समय अस्पताल की ओपीडी में डाक्टर आ गए थे, लेकिन पचर्ची काउंटर 10 बजे तक बंद था। स्वजन ने बताया कि उन्होंने पर्ची काउंटर खुलने का कुछ देर इंतजार किया, लेकिन बच्चे की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। मजबूरी में वे बच्चे को सीधे डाक्टर के पास लेकर पहुंचे। पहले तो डाक्टर ने पर्ची लाने को कहा,लेकिन जब यह पता चला कि पर्ची काउंटर बंद है, तो बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए डाक्टर को सादे पर्चे पर दवा लिखकर इलाज शुरू करना पड़ा। मरीजों का कहना है कि जयसिंहनगर सिविल अस्पताल का पर्ची काउंटर निर्धारित समय का पालन नहीं करता। काउंटर का समय सुबह सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक और शाम पांच बजे से छह बजे तक निर्धारित है, लेकिन अधिकांश दिनों में यह 10 बजे के बाद ही खोला जाता है। बुधवार सुबह भी कई मरीज पर्ची के लिए परेशान रहे। मरीजों का आरोप है कि पर्ची काउंटर संचालन करने वाले ठेकेदार की मनमानी के कारण आम जनता को परेशान होना पड़ता है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पर्ची काउंटर समय पर खोला जाए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और भविष्य में ऐसी गंभीर लापरवाही न हो। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाः राजेश मिश्रा ने कहा कि यदि पर्ची काउंटर समय पर नहीं खुल यु रहा है या आज देर से खोला गया है, तो संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में तुरंत वहां के बीएमओ से बात कर स्थिति की जानकारी ले रहे हैं।

