कोल माफियाओं का खूनी खेल: खितौली में वन अमले पर जानलेवा हमला, सोहागपुर पुलिस ने 03 आरोपी दबोचे

बंधक बनाकर पीटा,रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा समेत पूरी टीम लहूलुहान धमकी के बाद भी नहीं मिली सुरक्षा



Junaid khan - शहडोल। जिले में कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए सक्रिय कोल माफियाओं ने एक बार फिर हिंसा का तांडव मचाया। सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत खितौली बीट में जंगल की सुरक्षा के लिए निकली वन विभाग की टीम पर 30 से अधिक हमलावरों ने घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने शहडोल रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा सहित पूरी टीम को चारों ओर से घेर लिया, बंधक बनाया और बेरहमी से मारपीट की। घटना ने न केवल वन अमले की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जिले में सक्रिय अवैध कोयला सिंडिकेट के बढ़ते हौसलों को भी उजागर कर दिया है।

घटना के बाद हरकत में आई 

सोहागपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में वैधानिक कार्यवाही जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।

सोन नदी किनारे फल-फूल रहा था काला कारोबार

सूत्रों के अनुसार सोन नदी के किनारे लंबे समय से अवैध कोयला खनन का खेल चल रहा था। शिकायतों के आधार पर रेंजर विश्वकर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर कार्रवाई करने पहुंचे थे। कार्रवाई पूरी कर टीम जब लौट रही थी, तभी पहले से घात लगाए बैठे माफियाओं ने हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावरों की संख्या 30 से अधिक थी। उन्होंने टीम को घेरकर मोबाइल छीन लिए और कुछ देर तक बंधक बनाए रखा। विरोध करने पर लाठी-डंडों से हमला किया गया, जिससे कई वनकर्मी घायल हो गए। यह हमला सुनियोजित बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कोयला कारोबार से जुड़े लोगों ने पहले ही कार्रवाई की भनक मिलने पर तैयारी कर रखी थी। दो दिन पहले मिली थी धमकी जानकारी सामने आई है कि घटना से दो दिन पूर्व भी संबंधित माफियाओं ने रेंजर को खुलेआम धमकी दी थी। बावजूद इसके सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए। प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाकर माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए और नतीजा यह खूनी वारदात के रूप में सामने आया। जिले में यह पहली बार नहीं है जब सरकारी अमले पर हमला हुआ हो। इससे पूर्व ब्यौहारी क्षेत्र में पटवारी और एएसआई को ट्रैक्टर से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह सवाल उठ रहा है कि क्या फील्ड पर काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सुरक्षित हैं? वन विभाग ने दर्ज कराई शिकायत थाना सोहागपुर में फरियादी रामनरेश विश्वकर्मा (वन परिक्षेत्राधिकारी) पिता शिवप्रसाद विश्वकर्मा, उम्र 48 वर्ष, निवासी ग्राम फरहदा, तहसील मऊगंज, थाना लौर, जिला मऊगंज, हाल गांधी चौक फॉरेस्ट कॉलोनी थाना कोतवाली जिला शहडोल द्वारा आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उक्त रिपोर्ट पर थाना सोहागपुर में अप.क्र. 58/26 अंतर्गत धारा 132, 296 (ए), 127(1), 324(3), 3(5), 190, 191(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। दक्षिण वन मंडलाधिकारी श्रद्धा पंद्रे ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन से समन्वय किया जा रहा है।

03 आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय में पेश

प्रकरण की विवेचना के दौरान दिनांक 14.02.2026 को आरोपीगण राजू सिंह उर्फ राकेश सिंह पिता रविनाथ सिंह उम्र 50 वर्ष।

चिन्टू सिंह उर्फ जितेन्द्र सिंह पिता रामजी सिंह बघेल उम्र 34 वर्ष।

बेटन सिंह उर्फ बृजेश सिंह पिता रविनाथ सिंह उम्र 54 वर्ष।

सभी निवासी ग्राम बड़खेरा थाना सोहागपुर जिला शहडोल को विधिवत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को माननीय न्यायालय शहडोल के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण में वैधानिक कार्यवाही प्रचलित है। उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी सोहागपुर निरीक्षक अरुण कुमार पाण्डेय, उप निरीक्षक आनंद कुमार झारिया, सहायक उप निरीक्षक रामनारायण पाण्डेय, प्रधान आरक्षक 266 मनोज शुक्ला, प्रधान आरक्षक 219 संतोष सिंह, प्रधान आरक्षक 535 रामनिवास पाण्डेय एवं आरक्षक जगन्नाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

यह हमला केवल वन विभाग की टीम पर नहीं, बल्कि जिले की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक साख पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रहेगी या फिर अवैध कोयला सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचकर कठोर कदम उठाए जाएंगे? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सख्त और निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे हमले आगे भी जारी रह सकते हैं। जब तक इन माफियाओं के खिलाफ ठोस रणनीति बनाकर अभियान नहीं चलाया जाता, तब तक फील्ड में काम करने वाला हर सरकारी कर्मचारी खतरे में रहेगा। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या कोल माफियाओं की कमर टूटेगी या फिर जंगल की रक्षा करने वाले यूं ही लहूलुहान होते रहेंगे?

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