काला झंडा विवाद में बवाल: नाबालिग की परीक्षा छूटी, कांग्रेस ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस ने ऐलान किया,शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल पहुंचेंगे होगा कलेक्ट्रेट का घेराव




Junaid khan - शहडोल। धनपुरी मुख्यमंत्री के काफिले को काला झंडा दिखाने की घटना अब केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई, नाबालिग की गिरफ्तारी और बोर्ड परीक्षा छूटने जैसे संवेदनशील मुद्दों के कारण राजनीतिक व सामाजिक विवाद का बड़ा रूप ले चुकी है। धनपुरी में हुई इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन” करार देते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

नाबालिग छात्र जेल भेजा, 12वीं की परीक्षा छूटी

मामले में पुलिस ने कुल 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की। इनमें से 37 को जमानत पर रिहा कर दिया गया, जबकि आशू चौधरी, शेख साजिद उर्फ सन्नी और एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्र को जेल भेजा गया। पुलिस ने नाबालिग को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर बुढ़ार उप जेल भेजा। करीब तीन दिन बाद मंगलवार सुबह लगभग 7 बजे उसे रिहा किया गया, लेकिन तब तक वह कक्षा 12वीं की अंग्रेजी बोर्ड परीक्षा देने परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सका। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने सोमवार को तहसीलदार के समक्ष कई बार निवेदन किया था कि छात्र की मंगलवार को महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षा है, लेकिन प्रशासन ने राहत नहीं दी। इतना ही नहीं, छात्र को मंगलवार सुबह बिना परिजनों को सूचना दिए रिहा कर दिया गया, जिससे परीक्षा में शामिल होना संभव नहीं हो पाया। इस घटना ने प्रशासन की संवेदनशीलता और नाबालिग के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो अन्य आरोपियों की भी रिहाई 

बुधवार सुबह शेख साजिद उर्फ सन्नी और आशू चौधरी को भी बुढ़ार उप जेल से रिहा कर दिया गया। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष आज़ाद बहादुर सिंह, प्रदीप सिंह, सूफियान खान, अभिषेक शुक्ला, राम सिंह, सुजीत सिंह, नवाब खान, अजय सिंह, अरविंद नायक, शेख आबिद, असफिया आलम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता जेल पहुंचे और दोनों को रिहा कराकर बाहर लाए। रिहाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई का आरोप लगाया। लाठीचार्ज और दमन का आरोप कांग्रेस का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध के दौरान निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें अनावश्यक रूप से जेल भेजा गया। जिला कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को धरना देकर ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई की समीक्षा नहीं की तो आंदोलन तेज किया जाएगा। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल पहुंचेंगे और कलेक्ट्रेट का घेराव कर लाठीचार्ज व गिरफ्तारी के विरोध में बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

प्रशासन पर उठे सवाल 

पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या एक नाबालिग छात्र की बोर्ड परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण परिस्थिति को देखते हुए प्रशासन को मानवीय आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए था? कानूनी जानकारों का कहना है कि धारा 151 के तहत की गई गिरफ्तारी एहतियाती कार्रवाई होती है, जिसमें परिस्थितियों के आधार पर त्वरित जमानत या रिहाई संभव होती है। ऐसे में परीक्षा छूटने की घटना प्रशासनिक समन्वय की कमी की ओर इशारा करती है। 

राजनीतिक तापमान चढ़ा 

घटना के बाद शहडोल जिले की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। अब सभी की निगाहें शुक्रवार को प्रस्तावित आंदोलन पर टिकी हैं, जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है। यदि मामला और तूल पकड़ता है तो यह प्रदेश स्तर पर भी सियासी मुद्दा बन सकता है। अपडेट की प्रतीक्षा में: प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलते ही प्रकाशित की जाएगी।

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