थाने के अंदर मारपीट, एफआईआर की धमकी और नशीले पदार्थों के संरक्षण का आरोप
Junaid khan - शहडोल। जिले के सिंहपुर थाना अंतर्गत पुलिस कर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। कुशवाहा महासभा ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर सिंहपुर थाना में पदस्थ पुलिस कर्मियों पर फरियादी के साथ मारपीट,अवैध नशीले पदार्थों के संरक्षण और झूठी एफआईआर में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर समाज में आक्रोश व्याप्त है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। कुशवाहा महासभा के अनुसार दिनांक 05 फरवरी 2026 को लगभग 10 बजे ग्राम पड़मनिया कसरिहा टोला में मुकेश कुशवाहा के साथ अमरेंद्र तिवारी, दिलीप शर्मा एवं प्रकाश तिवारी द्वारा मारपीट की गई। पीड़ित द्वारा सिंहपुर थाना को सूचना दिए जाने पर पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ित को थाना लाया गया, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि थाना पहुंचते ही फरियादी के साथ न केवल उचित कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि थाना परिसर में ही पुलिस कर्मियों द्वारा उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। शिकायत में कहा गया है कि थाना में पदस्थ पुलिस कर्मी दीपक सिंह परिहार द्वारा पीड़ित मुकेश कुशवाहा के साथ हाथ-घूंसे से मारपीट की गई। यह घटना कथित रूप से दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच की बताई जा रही है। शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि थाना प्रभारी एवं अन्य पुलिस कर्मियों ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय फरियादी को ही डराने धमकाने का प्रयास किया और झूठी एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी गई। इससे पीड़ित मानसिक रूप से भयभीत हो गया। कुशवाहा महासभा ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमरेंद्र तिवारी के पास गांजा जैसे नशीले पदार्थ होने की जानकारी पहले से थी, लेकिन इसके बावजूद उसके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। महासभा का आरोप है कि सिंधुर थाना में पदस्थ कुछ पुलिस कर्मी नशीले पदार्थों की तस्करी को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे क्षेत्र में अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं। महासभा ने मांग की है कि सिंहपुर थाना में पदस्थ रामजी डोंडे और मनोज बर्मनिया सहित अन्य संबंधित पुलिस कर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उन्हें तत्काल थाना से हटाया जाए। साथ ही थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कुशवाहा महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित को न्याय नहीं दिया गया तो समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा। महासभा का कहना है कि कानून के रक्षक यदि ही कानून तोड़ेंगे, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाते हैं।

