खड़े होकर सोनोग्राफी का इंतजार: जिला अस्पताल में अव्यवस्था का आलम

गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के बैठने तक की सुविधा नहीं,घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर 


Junaid khan - शहडोल। शासकीय जिला चिकित्सालय शहडोल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत एक बार फिर सामने आई है। यहां सोनोग्राफी कराने आने वाले मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें घंटों खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल परिसर में सोनोग्राफी कक्ष के बाहर बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। पहले यहां तीन बेंच रखी गई थीं, लेकिन अब केवल एक ही बेंच बची है, जिस पर मुश्किल से तीन-चार लोग बैठ पाते हैं। बाकी मरीजों को या तो जमीन पर बैठना पड़ता है या फिर लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा परेशानी

अपनी बारी के इंतजार में खड़ी गर्भवती महिलाओं ने बताया कि कई बार उन्हें एक से दो घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ऐसे में चक्कर आना, थकान और असहजता जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। गंभीर मरीजों और बुजुर्गों की हालत भी कुछ अलग नहीं है। एक परिजन ने बताया कि अस्पताल में इलाज तो दूर, बैठने की भी सुविधा नहीं है। मजबूरी में मरीज को दीवार का सहारा देकर खड़ा रखना पड़ता है।

पहले भी उठ चुका है मुद्दा 

जानकारी के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। पूर्व में भी बैठने की व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। कुछ समय के लिए अतिरिक्त बेंच रखे गए थे, लेकिन बाद में उन्हें हटा लिया गया। अब स्थिति फिर जस की तस हो गई है।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष 

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ का कहना है कि समस्या की जानकारी मिली है और जल्द ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मरीजों को असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सवाल व्यवस्था पर। जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र में यदि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए बैठने की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।

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