SECL में ‘टेक्निकल इंस्पेक्टर’ का तांडव?

शारदा खुली खदान से शिकायतों पर हटे रोशन तोदी, अब सेल्स ऑफिस में डीओ होल्डरों से कथित दुर्व्यवहार

पत्रकार को जान से मारने की धमकी का आरोप

 


Junaid khan - शहडोल। कोयला क्षेत्र में एक अधिकारी का बढ़ता दुस्साहस अब खुलेआम चुनौती बन चुका है। South Eastern Coalfields Limited के सोहागपुर क्षेत्र में पदस्थ टेक्निकल इंस्पेक्टर रहे रोशन तोदी पर पहले अवैध वसूली के आरोप लगे, शिकायतों के बाद शारदा खुली खदान से हटाया गया, लेकिन आरोप है कि सेल्स ऑफिस पहुंचते ही वही रवैया फिर सामने आ गया। डीओ होल्डरों को कथित रूप से परेशान करना, सवाल उठाने पर पत्रकार से गाली-गलौज और जान से मरवाने की धमकी क्या यह प्रशासनिक पद का दुरुपयोग नहीं तो और क्या है? अब सवाल सीधा है क्या SECL प्रबंधन कार्रवाई करेगा, या फिर रसूख के आगे नियम-कानून फिर बेबस साबित होंगे? सोहागपुर/धनपुरी। South Eastern Coalfields Limited (SECL) के सोहागपुर क्षेत्र में पदस्थ टेक्निकल इंस्पेक्टर रोशन तोदी एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर उन्हें शारदा खुली खदान (ओसीएम) से हटाकर एरिया सेल्स ऑफिस में तैनात किया गया था, लेकिन आरोप है कि वहां भी उनका रवैया नहीं बदला।

अवैध वसूली के आरोप, तबादला बना ‘राहत’?

सूत्रों के मुताबिक, शारदा खुली खदान में पदस्थ रहते हुए रोशन तोदी पर ट्रांसपोर्टरों से कथित अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे थे। कई शिकायतों के बाद प्रबंधन ने उन्हें तकनीकी पद से हटाकर सेल्स ऑफिस में पदस्थ कर दिया। माना जा रहा था कि यह कदम व्यवस्था सुधारने के लिए उठाया गया है, लेकिन जानकारों का दावा है कि समस्या जस की तस बनी हुई है। डीओ होल्डरों से कथित उत्पीड़न सेल्स ऑफिस में पदस्थापना के बाद भी रोशन तोदी पर डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) होल्डरों को लगातार परेशान करने के आरोप लग रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि अनावश्यक आपत्तियां, फाइलें रोकना और दबाव बनाना आम बात हो गई है। इससे कोयला उठाव की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और छोटे कारोबारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

पत्रकार से गाली-गलौज और धमकी का आरोप

मामला तब और तूल पकड़ गया जब शिकायतों की पड़ताल के लिए पहुंचे एक पत्रकार के साथ कथित रूप से गाली-गलौज की गई और जान से मरवाने की धमकी दी गई। इस संबंध में धनपुरी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि कानून व्यवस्था को खुली चुनौती भी है।

प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या महज तबादला ही समाधान है, या फिर मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? SECL जैसे सार्वजनिक उपक्रम में यदि अधिकारी पर अवैध वसूली, दुर्व्यवहार और धमकी जैसे आरोप लगते हैं, तो यह संस्था की साख पर सीधा आघात है। अब नजरें प्रबंधन और पुलिस प्रशासन पर हैं। क्या वे निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएंगे या फिर मामला फाइलों में दब जाएगा?

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