रिटायर्ड सीआरपीएफ जवान से 88 हजार की ठगी, व्यापारी की कार का शीशा तोड़ 4 लाख पार, अलग-अलग इलाकों में घरों को बनाया निशाना सवालों के घेरे में पुलिस व्यवस्था
Junaid Khan - शहडोल। संभाग में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि बदमाशों में पुलिस का कोई खौफ दिखाई नहीं दे रहा। एक ही समय में साइबर ठगी, दिनदहाड़े लूट और सूने घरों में चोरी जैसी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। लगातार हो रही इन वारदातों से आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है, वहीं पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सबसे पहले मामला सामने आया सोहागपुर थाना क्षेत्र का, जहां साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड सीआरपीएफ जवान को अपना शिकार बना लिया। ठगों ने पता सुधारने के नाम पर मोबाइल पर एक लिंक भेजा। जैसे ही पीड़ित ने लिंक ओपन किया, खाते से पहले 80 हजार और फिर कुछ ही देर में 8 हजार रुपये ट्रांसफर हो गए। कुल 88 हजार रुपये की ठगी ने यह साफ कर दिया कि साइबर अपराधी कितने शातिर हो चुके हैं। पीड़ित ने तत्काल साइबर सेल पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक खाता ब्लॉक कराया, लेकिन सवाल यही है कि आखिर ऐसे फर्जी लिंक आसानी से लोगों तक कैसे पहुंच रहे हैं? दूसरी बड़ी वारदात जयसिंहनगर थाना क्षेत्र में सामने आई, जहां दिनदहाड़े एक व्यापारी की कार का शीशा तोड़कर बदमाशों ने 4 लाख रुपये उड़ा लिए। जानकारी के अनुसार व्यापारी बैंक से नकदी निकालकर लौट रहा था और कार को सड़क किनारे खड़ा कर सामान लेने गया था। इसी दौरान बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने कार का शीशा तोड़कर डैशबोर्ड में रखा पैसों से भरा बैग लेकर फरार हो गए। यह घटना बाजार क्षेत्र में हुई, जहां आमतौर पर भीड़ रहती है, इसके बावजूद बदमाश बेखौफ वारदात को अंजाम देकर निकल गए। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की, लेकिन अब तक आरोपियों का कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि जब शहर में इतने कैमरे लगे हैं तो अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हो रही है। तीसरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के कोइलारी इलाके का है, जहां सूने मकान को निशाना बनाकर चोरों ने नकदी और जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। घर के मालिक के अनुसार 22-23 अप्रैल की दरमियानी रात को चोरों ने ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया और अलमारी में रखे करीब 30-35 हजार रुपये नकद और जेवरात लेकर फरार हो गए। सुबह जब घर का दरवाजा टूटा मिला तो घटना का पता चला। इसी तरह गोहपारू क्षेत्र में भी एक और चोरी की वारदात सामने आई, जहां परिवार के घर से बाहर होने का फायदा उठाकर बदमाशों ने करीब 45 हजार रुपये के सामान पर हाथ साफ कर दिया। घर में रखे बैग से जेवर और नकदी गायब मिले। इन लगातार घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि चोर गिरोह सक्रिय हैं और पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इन तीनों बड़ी घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो साफ होता है कि शहडोल में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। साइबर ठग मोबाइल के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं, वहीं बदमाश खुलेआम बाजार में लूटपाट कर रहे हैं और चोर सूने घरों को निशाना बना रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि अपराधियों को न तो कानून का डर है और न ही पुलिस का खौफ। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब शहडोल जैसे संभागीय मुख्यालय में आईजी, डीआईजी, एसपी, एडिशनल एसपी,डीएसपी और जैसे वरिष्ठ अधिकारी तैनात हैं, तब भी अपराधों पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है? अगर बड़े शहर में यह हाल है तो छोटे कस्बों और तहसीलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की गश्त और निगरानी कमजोर हो चुकी है। साइबर जागरूकता के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। बाजार क्षेत्रों में भी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे अपराधी आसानी से वारदात कर निकल जाते हैं। लगातार बढ़ते अपराधों के बीच जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उन्हें न्याय कब मिलेगा और पुलिस कब तक केवल जांच का आश्वासन देती रहेगी। अपराधियों की गिरफ्तारी में देरी से लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।
जरूरत इस बात की है कि पुलिस महकमा सख्त रणनीति अपनाए, साइबर अपराधों पर विशेष अभियान चलाए, बाजार और रिहायशी क्षेत्रों में गश्त बढ़ाए और सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी बनाए। साथ ही,आम जनता को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से बचने की सलाह दी जानी चाहिए। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो शहडोल में अपराधों की यह बढ़ती लहर और भयावह रूप ले सकती है। फिलहाल हालात यही बता रहे हैं कि अपराधी बेखौफ हैं और कानून का डर कहीं खो गया है।
