रेलवे में '30 हजार पदों की बलि' पर भड़का आक्रोश,मजदूर संघ ने खोला मोर्चा; डगमगाएगी रेल सुरक्षा, बढ़ेगा हादसों का खतरा
Junaid Khan - शहडोल। भारतीय रेलवे को निजीकरण के आत्मघाती रास्ते पर धकेलने और युवाओं के रोजगार पर कैंची चलाने की प्रशासनिक साजिशों के खिलाफ अब कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट गया है। रेलवे बोर्ड द्वारा एक झटके में 30 हजार महत्वपूर्ण पदों को सरेंडर (खत्म) किए जाने के तानाशाही निर्णय ने पूरे महकमे में बारूद जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इस कर्मचारी विरोधी और जनविरोधी नीति के विरोध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मजदूर संघ (बिलासपुर मंडल) ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालय के समक्ष एक विशाल और ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन कर सीधे तौर पर व्यवस्था को चुनौती दे डाली है। भारतीय रेलवे मजदूर संघ के आह्वान पर 15 मई से शुरू हुआ विरोध का यह सिलसिला 29 मई तक 'काला पट्टी बांधकर' विरोध पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है, जिसने रेल प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मंडल सचिव प्रोम्पी कुमार सिंह के कुशल और आक्रामक नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के हकों पर डाका डालने वाले हर अवैध और मनमाने फैसले का मुंहतोड़ जवाब सड़क से लेकर संसद तक दिया जाएगा।
कर्मचारियों पर बढ़ता 'वर्कलोड' और सत्ताधारी यूनियन की संदेहास्पद चुप्पी पर तीखे सवाल
इस जनाक्रोश प्रदर्शन में राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने संबोधन में सीधे तौर पर नीति-निर्माताओं को आड़े हाथों लिया। इसके साथ ही वरिष्ठ जोनल सलाहकार निमाई बनर्जी और जोनल अध्यक्ष कमलेश सिंह समेत कई कद्दावर पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित करते हुए रेल प्रबंधन की रीढ़ विहीन नीतियों को बेनकाब किया। वक्ताओं ने गरजते हुए कहा कि लगातार हो रही पदों की कटौती और नई भर्तियों पर अघोषित रोक के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव (वर्कलोड) इस कदर बढ़ चुका है कि वे मानसिक और शारीरिक रूप से टूट रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि भारतीय रेल की सुरक्षा और कार्यक्षमता के लिए भी एक बड़ा 'टाइम बम' साबित हो रही है। इस दौरान कर्मचारी विरोधी नीतियों के साथ-साथ सत्ताधारी यूनियन की संदिग्ध निष्क्रियता और मिलीभगत की भी तीखी आलोचना की गई, जो केवल मूकदर्शक बनी बैठी है।
डीआरएम के जरिए रेलवे बोर्ड अध्यक्ष को अल्टीमेटम: फैसला वापस नहीं तो थमेंगे रेल के पहिए
प्रदर्शन के अंत में आक्रोशित कर्मचारियों और मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने मंडल रेल प्रबंधक को एक कड़ा और चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष से सीधे मांग की गई है कि 30 हजार पदों को समाप्त करने के इस आत्मघाती और अवैध निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। मजदूर नेताओं ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन और चेतावनी को हल्के में लेने की भूल की, तो आने वाले दिनों में यह चिंगारी एक बड़े देशव्यापी आंदोलन का रूप लेगी, जिससे रेल का चक्का जाम होना तय है। हमारे अखबार की पैनी नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है, और इस विरोध प्रदर्शन के बाद रेल प्रशासन के गलियारों में हड़कंप का माहौल साफ देखा जा सकता है।
