कूलर से 'जहर' बरसाकर 70 लाख की डकैती,खाकी ने FIR में फूंक दी 'लापरवाही की फूंक' महज 90 हजार की दिखाई चोरी
Junaid Khan - शहडोल। क्षेत्र में बेलगाम हो चुके अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे आम जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले नए-नए खौफनाक हथकंडे अपनाने लगे हैं। थाना जैतपुर के अंतर्गत ग्राम कोठारी में एक ऐसी सनसनीखेज और दुस्साहसिक वारदात सामने आई है, जिसने न केवल पुलिसिया गश्त के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को सीधी चुनौती दे डाली है। शातिर चोरों ने किसी सूने मकान को नहीं, बल्कि एक भरे-पूरे घर को फिल्मी अंदाज में अपना निशाना बनाया। वारदात की कड़वी सच्चाई यह है कि चोरों ने घर के बाहर चल रहे एयर कूलर में कोई अत्यंत नशीली दवा या घातक केमिकल स्प्रे कर दिया। ठंडी हवा के झोंकों के साथ यह सुंघनी दवा पूरे घर में फैल गई, जिसके चलते अंदर गहरी नींद में सो रहे परिवार के सभी सदस्य पूरी तरह अचेत और बेसुध हो गए। इसके बाद बेखौफ अपराधियों ने पूरे आराम से अलमारी का लॉकर तोड़ा और करीब 70 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के पुश्तैनी जेवरात और नकदी समेटकर रफूचक्कर हो गए। इस घटना ने क्षेत्र के नागरिकों को दहशत में डाल दिया है कि अब लोग अपने घरों में कूलर चलाकर सोना भी सुरक्षित नहीं समझ सकते। लाखों की डकैती पर पुलिस का '90 हजार' वाला मरहम, रसीद मांगने का अजीब फॉर्मूला प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कोठारी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश प्रसाद बारी के घर में 17-18 मई की दरमियानी रात नाती-नातिन के जन्मदिन का एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम था। उत्सव के समापन के बाद थकान के कारण परिवार के सभी सदस्य आंगन की परछी (बरामदे) और कमरों में सोने चले गए थे। इसी बीच आधी रात को पहुंचे अपराधियों ने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। अगली सुबह नशीली दवा के भारी असर के कारण परिजनों की नींद बेहद देर से और भारी सिरदर्द के साथ खुली। जब उन्होंने जागकर देखा तो होश उड़ गए; बाहर से दरवाजे बंद थे। किसी तरह रसोई के पास की ढीली सिटकनी को खोलकर लोग बाहर निकले। बगल के कमरे में जाकर देखा तो अलमारी का ताला टूटा था और लॉकर में रखे शिक्षक की पत्नी व बाहर रहने वाली बहू के सारे गहने गायब थे। चोरों ने 28 तोला सोना, 9 किलो चांदी के जेवरात और 90 हजार रुपये नकद बटोरे थे, जिनकी बाजार के वर्तमान मूल्य के हिसाब से कीमत करीब 70 लाख रुपये आंकी जा रही है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि मौके पर फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और धनपुरी एसडीओपी सहित जैतपुर थाना प्रभारी जेपी मिश्रा की टीम पहुंचने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर में महज 90 हजार रुपये की ही चोरी दर्ज की है। पुलिस का तर्क है कि गहने पुराने थे, इसलिए सबके बिल और रसीद मिलने के बाद ही वास्तविक मूल्यांकन किया जाएगा। प्रशासन को सीधी चुनौती,कब तक कागजी दावों के पीछे छिपेगी जैतपुर पुलिस? यह घटना सीधे तौर पर क्षेत्र की कानून व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी को खुली चुनौती देती है। अपराधियों ने जिस तरह से केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल किया, वह यह दर्शाता है कि वे किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हैं और उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं है। वहीं दूसरी ओर, पीड़ित परिवार की इतनी बड़ी क्षति होने के बावजूद पुलिस का एफआईआर में इतनी कम राशि दिखाना और सोने-चांदी की पुरानी रसीदें मांगना, उनके घाव पर नमक छिड़कने जैसा है। वर्तमान बाजार दर के हिसाब से जनता साफ देख रही है कि नुकसान लाखों का है, मगर पुलिस आंकड़ों की बाजीगरी कर मामले की गंभीरता को कम करने का प्रयास कर रही है। हालांकि थाना प्रभारी का दावा है कि आरोपी जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस केवल घटना के बाद लकीर पीटती रहेगी या इन शातिर अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस और सख्त कार्रवाई करके जनता के बीच खो चुके अपने विश्वास को बहाल करेगी?
