डिजिटल सबूत से खुला सिंडिकेट का खेल,अमझोर शराब भट्टी में खुलेआम डकैती,आबकारी अमला मौन

अशोक राय ने ऑनलाइन पेमेंट का स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर व्यवस्था को ललकारा,ऊपर तक हिस्सा जाता है का दावा कर रहे बेखौफ सेल्समैन,अब कलेक्टर की चौखट पर पहुंचेगा मामला


Junaid Khan - शहडोल। जिले के जयसिंहनगर क्षेत्र अंतर्गत अमझोर स्थित विदेशी शराब भट्टी इन दिनों सरकारी नियमों को ठेंगे पर रखकर अवैध वसूली का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुकी है। पूर्व में इस भट्टी की मनमानी को लेकर उठी आवाजों का ऐसा असर हुआ है कि अब जनता का आक्रोश सड़क पर आ गया है। अमझोर भट्टी में तय कीमत (एमआरपी) से कई गुना अधिक दामों पर शराब बेचे जाने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने आबकारी विभाग की साख को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। यहाँ लंबे समय से ओवररेटिंग का गंदा खेल धड़ल्ले से जारी है। लेकिन इस बार शराब माफिया का पाला एक सजग और जागरूक नागरिक अशोक राय से पड़ गया। अशोक राय ने इस खुली लूटखसोट के खिलाफ न सिर्फ मोर्चा खोल दिया है, बल्कि उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर कर व्यवस्था की नींद उड़ा दी है।

धौंस भरा गैर-जिम्मेदाराना जवाब,जिसको जो उखाड़ना है उखाड़ ले 

जब जागरूक नागरिक अशोक राय ने शराब की बोतलों पर लिखे प्रिंट रेट से ज्यादा पैसे वसूलने का कड़ा विरोध किया, तो काउंटर पर बैठे भट्टी कर्मचारी ने अपनी गलती सुधारने के बजाय गुंडागर्दी और हेकड़ी दिखाना शुरू कर दिया। सेल्समैन ने दो टूक और गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए सीधे प्रशासन को चुनौती दे डाली। जब अशोक राय ने इस अवैध वसूली की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही,तो भट्टी संचालक ने सीना ठोककर धौंस जमाते हुए कहा,जिसको जो उखाड़ना है उखाड़ ले,सीधे आबकारी वालों से जाकर बात कर लो। हमें ऊपर तक हिस्सा देना पड़ता है। आपको ज्यादा दिक्कत है,तो आबकारी अधिकारियों से ही शिकायत करो। यह बयान साफ करता है कि शराब ठेकेदारों के हौसले कितने बुलंद हैं और उन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।

डिजिटल साक्ष्य ने बिगाड़ा खेल,ऑनलाइन पेमेंट का स्क्रीनशॉट हुआ वायरल

इस बार शराब सिंडिकेट के सिपहसालार चाहकर भी मुकर नहीं सकते, क्योंकि अशोक राय ने इस अवैध वसूली को उजागर करने के लिए बकायदा ऑनलाइन पेमेंट का सहारा लिया। उन्होंने अधिक वसूली गई राशि का ऑनलाइन भुगतान कर उसका स्क्रीनशॉट साक्ष्य के रूप में सार्वजनिक तौर पर साझा कर दिया है। इस पुख्ता और अकाट्य डिजिटल सबूत के सामने आने के बाद भट्टी प्रबंधन पूरी तरह घिर गया है और सफेदपोशों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी हैं। इस पेमेंट स्क्रीनशॉट में साफ देखा जा सकता है कि प्रिंट रेट से कितनी अधिक राशि की अवैध वसूली की गई है। यह स्क्रीनशॉट अब सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

आबकारी विभाग के 'कथित संरक्षण' में फल-फूल रहा अवैध साम्राज्य

भट्टी संचालक के इस बेखौफ अंदाज और लंबे समय से चल रही इस अवैध वसूली से एक बात पूरी तरह साफ जाहिर होती है कि इस पूरे ओवररेटिंग के खेल को आबकारी विभाग के आला अधिकारियों का कथित तौर पर मूक संरक्षण प्राप्त है। बिना विभागीय सांठगांठ और 'महीने की बंधी रकम' के कोई भी सेल्समैन इतनी निडरता से लगातार जनता की जेब पर डाका नहीं डाल सकता। अशोक राय का सीधा आरोप है कि यह पूरी कयावद एक सोचे-समझे सिंडिकेट के तहत चल रही है, जहाँ नियम-कायदे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और अमझोर की खिड़की से सिर्फ शराब नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का खेल भी चौबीस घंटे परोसा जा रहा है।

कलेक्टर और कमिश्नर की चौखट पर फटेगा बम,बड़े खुलासे की तैयारी 

जागरूक नागरिक अशोक राय का कहना है कि अमझोर दारू भट्टी की कहानी सिर्फ ओवररेटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी चोर खिड़की से रात भर शराब की अवैध सप्लाई का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। अशोक राय ने खुली चेतावनी दी है कि वे इस पेमेंट स्क्रीनशॉट और पुख्ता साक्ष्यों के साथ बहुत जल्द जिला कलेक्टर व आबकारी कमिश्नर से इसकी लिखित शिकायत करने जा रहे हैं, ताकि इस पूरे नेक्सस का भंडाफोड़ हो सके। अब देखना यह होगा कि इस डिजिटल सबूत के सामने आने के बाद सूबे के जिम्मेदार हुक्मरान अमझोर शराब भट्टी पर क्या बुलडोजर जैसी कड़ी कार्रवाई करते हैं, या फिर हमेशा की तरह आबकारी विभाग अपनी आंखें मूंदे बैठा रहकर इस महालूट का साझीदार बना रहेगा।

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