शहडोल में अवैध शराब कारोबार बेलगाम,गांव-गांव पहुंच रही पैकारी की खेप
आबकारी उप निरीक्षक रजनीश बना बेताज बादशाह
Junaid Khan - शहडोल। जिले में शराब ठेका बदलते ही अवैध शराब कारोबार ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। अप्रैल 2026 से नई ठेका व्यवस्था लागू होने के बाद शहडोल में पैकारों का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। हालात यह हैं कि जिन क्षेत्रों में पहले तो सीमित पैमाने पर अवैध शराब की बिक्री होती थी, वहां अब खुलेआम पैकारी का कारोबार फल-फूल रहा है। आबकारी विभाग की निष्क्रियता और कथित संरक्षण के चलते गांव-गांव तक अवैध शराब की सप्लाई पहुंच रही है। जानकारी के अनुसार पूर्व ठेकेदार ऋषि के समय में मुख्यालय के आसपास करीब 35 पैकारी ठिकाने सक्रिय थे, लेकिन नई ठेका व्यवस्था लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 70 तक पहुंच गई है। विचारपुर, कल्याणपुर, पचगांव, मिठौरी, अमरहा, भमरहा, सिंहपुर, सिंदूरी, मझगवा, केलमनिया, जमुई, जमुना, गोरतरा, पोंगरी, नदना, खेतौली, नवलपुर, धुरवार, कंचनपुर, हर्री, निपानिया, बरुका, छतवई, पटासी और रोहनिया सहित कई गांवों में पैकारों की सक्रिय फौज खड़ी कर दी गई है।
सूत्र बताते हैं
आसपास के गांवों में मोटरसाइकिल के जरिए अवैध शराब पहुंचाई जा रही है, जबकि दूरस्थ इलाकों में बिना नंबर की चारपहिया वाहनों से शराब की खेप भेजी जा रही है। खुलेआम चल रहे इस नेटवर्क पर कार्रवाई न होना आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
एमआरपी से अधिक कीमत वसूली,ग्राहकों से विवाद आम
जिले में शराब दुकानों पर एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने के आरोप भी लगातार सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रतिदिन ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें ग्राहक निर्धारित मूल्य से अधिक रकम लिए जाने का विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। कई मामलों में ग्राहक दुकानों पर उपलब्ध क्यूआर कोड और रेट सूची की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। वायरल वीडियो में यह भी देखा गया है कि कुछ सैल्समैन ग्राहकों से अभद्रता और विवाद करते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों को मनमानी की खुली छूट दे दी गई है, जिससे आम उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं।
एक उप निरीक्षक के भरोसे पूरा जिला
जिले में आबकारी व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांचों सर्किल की 29 देशी-विदेशी शराब दुकानें, दोनों बांड, अंग्रेजी और देशी शराब के वेयरहाउस की जिम्मेदारी केवल एक आबकारी उप निरीक्षक रजनीश त्रिपाठी के पास है। इतने बड़े दायित्व के बावजूद अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
कार्रवाई शून्य,संरक्षण का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग की निष्क्रियता के कारण अवैध शराब माफिया बेखौफ होकर कारोबार चला रहे हैं। बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष भी कार्रवाई लगभग नगण्य बताई जा रही है। नए ठेका लागू होने के बाद अब तक अवैध पैकारी या ओवररेटिंग को लेकर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
जिले में बढ़ती अवैध पैकारी और शराब की ओवररेटिंग को लेकर अब आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो गांवों में अपराध और सामाजिक समस्याएं और तेजी से बढ़ सकती हैं।
जनता पूछ रही सवाल
आखिर अवैध शराब कारोबार पर लगाम कब लगेगी.एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और सबसे बड़ा सवाल... क्या आबकारी विभाग केवल मूकदर्शक बनकर रह गया है?
