जनहित के मुद्दों पर अड़ंगा लगाने वालों की अब खैर नहीं
Junaid Khan - शहडोल। स्थानीय जेल प्रशासन और विभागीय व्यवस्थाओं में व्याप्त विसंगतियों को लेकर लगातार मुखर रहने वाले समाचारों पर आखिरकार शासन-प्रशासन को मुहर लगानी ही पड़ी। जेलों की अंदरूनी कार्यप्रणाली और बंदियों के मानवाधिकारों को लेकर 'विंध्य सत्ता' द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब विंध्य क्षेत्र की न्यायिक व्यवस्था में एक बड़ा और सुधारात्मक बदलाव देखने को मिला है। नगर के प्रखर, प्रबुद्ध और प्रख्यात अधिवक्ता कार्तिकेय सामतानी को जिला जेल शहडोल एवं केंद्रीय जेल की संदर्शक समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। उनकी इस गरिमामयी नियुक्ति से न केवल विधिक बल्कि सामाजिक क्षेत्र में पूरी निष्ठा के साथ सक्रिय लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। वरिष्ठ पत्रकारों, कानूनविदों और समाजसेवियों ने इस निर्णय को न्याय और शुचिता की जीत बताया है। एडवोकेट कार्तिकेय सामतानी कोई नया नाम नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से सामाजिक विसंगतियों, प्रशासनिक लापरवाही और जनहित के गंभीर मुद्दों पर धरातल से लेकर न्यायालय तक सक्रिय रूप से संघर्ष करते रहे हैं। जेल संदरक्षक समिति के सदस्य के रूप में उनकी यह ताजपोशी उन विभागीय सफेदपोशों और पर्दे के पीछे अवैध गतिविधियों को शह देने वाले रसूखदारों के लिए एक खुली चुनौती मानी जा रही है, जो अब तक जेल की चहारदीवारी के भीतर अपनी मनमानी चलाते आ रहे थे। अब जब एक निष्पक्ष कानूनविद खुद जेल व्यवस्थाओं, बंदियों की बुनियादी समस्याओं, उनके कानूनी अधिकारों तथा सुधारात्मक गतिविधियों की कमान संभालेगा, तो निश्चित तौर पर जेल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के अनैतिक या अवैध सांठगांठ की कमर टूटना तय है। इस नियुक्ति को न्यायिक और सामाजिक दोनों ही क्षेत्रों में एक बेहद सकारात्मक और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इस बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावकारी नियुक्ति के पीछे राजनैतिक सूझबूझ और जनभावनाओं का भी पूरा सम्मान किया गया है। उक्त नियुक्ति जिला अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी श्रीमती अमिता चपरा की मजबूत अनुशंसा पर माननीय प्रभारी मंत्री महोदय द्वारा नामांकित की गई है। अमिता चपरा की इस दूरदर्शी अनुशंसा ने यह साबित कर दिया है कि संगठन अब जमीन पर काम करने वाले कर्मठ और ईमानदार चेहरों को आगे लाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। कार्तिकेय सामतानी की इस नई भूमिका से जहां एक ओर जेल सुधारों को नई गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जनहित के मुद्दों पर अड़ंगा लगाने वाले और अनैतिक कार्यों में संलिप्त तत्वों को यह साफ संदेश मिल गया है कि अब व्यवस्था की निगरानी एक बेहद सख्त और कानून के जानकार हाथों में है।
