प्रशासनिक लापरवाही की सूखी झाड़ियों में सुलग रही शहर की सुरक्षा,ग्रीन सिटी के सामने भड़की आग ने खोली सिस्टम की पोल

बस्ती तक पहुँचने वाली थीं आग की लपटें,दहशत में रहे सैकड़ों लोग,समय रहते खुद जागे नागरिक तो टला बड़ा हादसा


Junaid Khan - शहडोल। स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही और पर्यावरण के प्रति उदासीनता का एक और खौफनाक मंजर शहर के पॉश इलाके ग्रीन सिटी के सामने देखने को मिला। शुक्रवार की शाम अचानक खाली प्लांटेशन में भड़की भीषण आग ने न सिर्फ सरकारी दावों की हवा निकाल दी, बल्कि पास की घनी आबादी वाली बस्ती को भी खाक होने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। तेज गर्मी और प्रशासन की नाक के नीचे फैली सूखी झाड़ियों के चलते आग ने चंद मिनटों में ही ऐसा विकराल रूप अख्तियार कर लिया कि देखते ही देखते कीमती पेड़ जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गए। आग की गगनचुंबी लपटें जैसे-जैसे पास की बस्ती की ओर बढ़ने लगीं, पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दहशतजदा लोग अपने मासूम बच्चों और बूढ़ों को लेकर घरों से बाहर भागने लगे। यह प्रशासनिक तंत्र की नाकामी ही है कि जिस वक्त शहर के फेफड़े कहे जाने वाले ये पेड़ और इंसानी जिंदगियां खतरे में थीं, उस वक्त जिम्मेदार अमला गहरी नींद में सोया हुआ था।

देरी से पहुंचा दमकल दस्ता, जागरूक नागरिकों की तत्परता से बची सैकड़ों जानें

प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जमीनी हकीकत इस बात की गवाह है कि घटना के काफी देर बाद तक दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा था, जो कि फायर सेफ्टी मैनेजमेंट पर एक बड़ा तमाचा है। अगर वहां से गुजर रहे एक जागरूक नागरिक ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए तुरंत नगर पालिका और संबंधित उच्चाधिकारियों को फोन कर आगजनी की सूचना न दी होती, तो आज शहर एक भीषण त्रासदी का गवाह बनता। सूचना के बाद जब कुंभकर्णी नींद से जागा दमकल अमला मौके पर पहुंचा, तब जाकर स्थानीय युवाओं और नागरिकों की मदद से भारी मशक्कत के बाद आग पर बमुश्किल काबू पाया जा सका। समय रहते स्थानीय लोगों और फायर ब्रिगेड की इस संयुक्त कार्रवाई से पास की बस्ती तो सुरक्षित बच गई और एक बहुत बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने कई ऐसे सुलगते सवाल छोड़ दिए हैं जिनका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना ही होगा।

अवैध गतिविधियों और भू-माफियाओं के गठजोड़ पर उठे गंभीर सवाल,आखिर कब जागेगा प्रशासन? 

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सिर्फ भीषण गर्मी का तर्क देकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। शहर के बीचों-बीच स्थित इस बेशकीमती प्लांटेशन की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक होना किसी गहरी साजिश या फिर भू-माफियाओं और अवैध कृत्य करने वालों की मिलीभगत की ओर भी साफ इशारा करता है। आखिर इस खाली पड़े सरकारी या निजी प्लांटेशन की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या यह आग जानबूझकर लगाई गई थी ताकि जमीन को साफ कर भविष्य में कोई अवैध खेल खेला जा सके? इस तरह के कृत्य करने वाले असामाजिक तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने वाले इन दोषियों और अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने वाले अधिकारियों को अब बेनकाब करना ही होगा। इस गंभीर लापरवाही पर अब प्रशासन को केवल कागजी जांच की खानापूर्ति करने के बजाय सख्त और दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी, वरना जनता का यह आक्रोश आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।

Previous Post Next Post