शहडोल में 'रेत राज,बिना वैध ठेके के नदियों का सीना चीर रहे अवैध हाइवा, खनिज विभाग की 'मौन सहमति' पर उठ रहे सवाल

जैतपुर के गाड़ाघाट, लुकामपुर और गलहत्था बने अवैध उत्खनन के मुख्य 'हब,रात के अंधेरे में उड़ रही नियमों की धज्जियां

जिला खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य के बयानों और दावों की खुली पोल, शिकायत के बावजूद धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहन 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले में प्रकृति की अनमोल धरोहर और नदियों के अस्तित्व को रेत माफियाओं द्वारा सरेआम तार-तार किया जा रहा है। जिले में किसी भी रेत खदान का वैध ठेका न होने के बावजूद, सैकड़ों की तादाद में रेत से ओवरलोड भरे भारी-भरकम हाइवा वाहनों का बेखौफ आवागमन स्थानीय प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा है। सबसे भयावह स्थिति जैतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाड़ाघाट, लुकामपुर और गलहत्था क्षेत्रों की है, जो इस वक्त अवैध उत्खनन और परिवहन का सबसे बड़ा 'सेफ जोन' बन चुके हैं। खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे आधी रात को शुरू होने वाला यह काला खेल सुबह होने तक बेधड़क जारी रहता है। 'जेके न्यूज' के खुलासे और सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे वीडियो के बाद अब जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं कि आखिर बिना किसी वैध परमिशन के यह अरबों का 'रेत का खेल' किसकी सरपरस्ती में फल-फूल रहा है?

बीच सड़क पर भड़का ग्रामीणों का आक्रोश,रेत माफियाओं से तीखी झड़प 

अवैध परिवहन और रफ़्तार के इस जानलेवा आतंक से तंग आ चुके गाड़ाघाट मार्ग के स्थानीय ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। बीती रात गाड़ाघाट मार्ग पर तेज रफ्तार से रेत लोड कर भाग रहे एक हाइवा को जब जागरूक ग्रामीणों ने रोककर पूछताछ की, तो चालक और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वीडियो बनाने वाले स्थानीय युवक ने पुरजोर दावा किया है कि वाहन में भरी हुई रेत पूरी तरह अवैध है और इसे गाड़ाघाट से अवैध तरीके से लोड किया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि ठीक एक दिन पहले भी इंटरनेट मीडिया पर इसी तरह का एक और वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें रेत से भरे हाइवा चालक ने कैमरे के सामने कबूल किया था कि उसने यह रेत गलहत्था से लोड की है। ये दोनों ही संवेदनशील स्थान जैतपुर थाना क्षेत्र के अधीन आते हैं, जहाँ कानून व्यवस्था पूरी तरह बौनी साबित हो रही है।

अधिकारी सिर्फ जांच का थमा रहे 'लॉलीपॉप', कार्रवाई के नाम पर शून्य 

इस पूरे महाघोटाले पर जब जिला खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य से बात की गई, तो उन्होंने महज कागजी खानापूर्ति करते हुए बयान दाग दिया कि "यदि इन स्थानों से रेत निकाली जा रही है तो वह पूरी तरह अवैध है। बुधवार को खनिज अधिकारी ने बकायदा लिखित शिकायत मिलने की पुष्टि की थी और मौके पर टीम भेजकर सख्त जांच व कार्रवाई करने का खोखला आश्वासन भी दिया था। लेकिन अधिकारियों के इस खोखले दावों की हवा उसी रात निकल गई, जब गाड़ाघाट मार्ग से बेखौफ होकर दर्जनों रेत लोड हाइवा सरेआम गुजरते रहे, लेकिन मौके पर न तो खनिज विभाग की कोई जांच टीम दिखाई दी और न ही पुलिस का कोई जवान। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से खुलेआम अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का यह तांडव चल रहा है। कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बाद भी खनिज विभाग और पुलिस कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं, जो सीधे तौर पर माफियाओं के साथ उनकी 'मौन हिस्सेदारी' को बयां करता है। अगर इस संगठित गंदे धंधे पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई और माफियाओं के साथ-साथ दोषी अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो उग्र जन-आंदोलन के जरिए चक्काजाम होना निश्चित है।

कुर्सी पर बैठकर क्यों मौन है खनिज अमला? 

जब जिले में एक भी रेत खदान का वैध ठेका स्वीकृत नहीं है, तो फिर जैतपुर क्षेत्र की सड़कों पर रेत से लदे हाइवा किसकी पर्ची पर दौड़ रहे हैं?

सोशल मीडिया पर चालकों के लाइव कबूलनामे के बाद भी खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य ने अब तक गाड़ियों को जब्त क्यों नहीं किया?

दिन-रात हो रहे इस अवैध परिवहन से शासन को लगने वाले करोड़ों रुपए के राजस्व के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

क्या जिले की कड़क कलेक्टर साहिबा इस मामले को संज्ञान में लेकर लापरवाह खनिज अमले और जैतपुर पुलिस के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेंगी?

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