RTI कानून का मज़ाक,जानकारी के बदले आवेदक को थमा दिए 'कोरे कागज

RTI कानून का मज़ाक,जानकारी के बदले आवेदक को थमा दिए 'कोरे कागज


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ आम जनता का सबसे बड़ा हथियार कहे जाने वाले 'सूचना का अधिकार कानून' (RTI) को दबाने और उसका मज़ाक उड़ाने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक संबंधित विद्यालय में भ्रष्टाचार को छिपाने और जवाबदेही से बचने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार कर दीं। आवेदक द्वारा मांगी गई जरूरी और संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराने के स्थान पर विभाग द्वारा बाकायदा 'खाली पन्ने' (ब्लैक पेजेस) लिफाफे में बंद करके भेज दिए गए। यह कृत्य न केवल सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और जनता के वैधानिक अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है। इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब आवेदक ने पूरे मामले का वीडियो रिकॉर्ड कर प्रशासन की इस काली करतूत को सार्वजनिक कर दिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में आग की तरह फैल रहा है, जिसने सोए हुए सिस्टम को हिलाकर रख दिया है।

धारा 07 की धज्जियां उड़ीं,अब धारा 20 के तहत नपेंगे 'दागी' अधिकारी

इस पूरे मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का अहंकार और आरटीआई कानून के प्रति लापरवाही साफ उजागर होती है। आरटीआई अधिनियम की धारा 07 के अनुसार, किसी भी लोक सूचना अधिकारी (PIO) का यह सर्वोच्च वैधानिक दायित्व है कि वह निर्धारित समयावधि के भीतर आवेदक को सही, पूर्ण, स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराए। लेकिन यहाँ 'सच्चाई' को दबाने के लिए अधिकारियों ने जो रास्ता चुना, वह उन्हें सीधे जेल के सीखचों या भारी जुर्माने की ओर ले जा सकता है। जानबूझकर जानकारी को रोकना, भ्रामक, अपूर्ण या पूरी तरह निरर्थक (खाली पृष्ठ) उत्तर देना सीधे तौर पर आरटीआई अधिनियम की धारा 20 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करता है। सूत्रों की मानें तो विद्यालय प्रबंधन और संबंधित लोक सूचना अधिकारी ने अपनी कमियों और आर्थिक गड़बड़ियों को छिपाने के इरादे से इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया है। इस मामले में अब सीधे तौर पर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

पारदर्शिता का जनाजा,अजय कुमार मोटवानी की शिकायत पर जांच की तलवार 

अखबार में पूर्व में प्रकाशित खबरों के असर और इस बड़े खुलासे के बाद अब जिला प्रशासन बैकफुट पर है। आवेदक अजय कुमार मोटवानी ने इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न केवल प्रशासन को सीधी चुनौती दी है, बल्कि पूरे साक्ष्यों और वीडियो के साथ उच्चाधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। खाली पृष्ठ भेजकर सूचना देने का दावा करना यह साबित करता है कि विभाग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। पत्रकारिता के खोजी सिद्धांतों और इस बड़ी लीड के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। न्यायोचित और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग को लेकर सौंपे गए इस शिकायती पत्र और वीडियो साक्ष्य के बाद अब संबंधित अधिकारियों पर जांच की तलवार लटक गई है। देखना यह होगा कि सुस्त प्रशासनिक तंत्र इस 'कोरे कागज' वाले सिंडिकेट पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर हर बार की तरह फाइलों को दबाने का खेल खेला जाएगा।

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