मिस्ट सिस्टम' बंद होने की खबर छपते ही मचा हड़कंप,भ्रष्टाचार और अवैध पार्किंग माफिया को सीधी चुनौती
आजाद चौक और नेहरू कॉलेज तिराहे पर शो-पीस बने आधुनिक वाटर स्प्रे सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल,क्या सिर्फ कमीशनखोरी के लिए फूके गए थे जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए?
Junaid khan - शहडोल। धनपुरी नगर पालिका धनपुरी में जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई और सरकारी बजट को किस तरह ठिकाने लगाया जाता है, इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण शहर के प्रमुख चौराहों पर देखने को मिल रहा है। झुलसा देने वाली भीषण गर्मी के बीच नगरवासियों को राहत देने के नाम पर आजाद चौक और नेहरू कॉलेज तिराहे पर पहली बार लाखों रुपये की लागत से आधुनिक 'वॉटर स्प्रे मिस्ट सिस्टम' लगाया गया था। शुरुआती चंद दिनों में हवा में ठंडी फुहारें छोड़कर वातावरण को सुहावना बनाने और उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने वाला यह सिस्टम आज पूरी तरह ठप और कबाड़ में तब्दील हो चुका है। इस गंभीर लापरवाही और बंदरबांट को लेकर हमारे समाचार पत्र में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कुंभकर्णी नींद में सोए जिम्मेदार अधिकारियों और भ्रष्टाचार की मलाई चाटने वाले ठेकेदारों के खेमे में खलबली मच गई है। खबर का ऐसा तगड़ा असर हुआ है कि अब अपनी गर्दन फंसती देख नगर पालिका का अमला आनन-फानन में तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर इस वित्तीय गड़बड़ी पर लीपापोती करने के प्रयास में जुट गया है।
अवैध पार्किंग माफिया और जिम्मेदारों को सीधी चुनौती
यह सिर्फ एक मिस्ट सिस्टम के बंद होने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा प्रशासनिक घालमेल और स्थानीय रसूखदार माफियाओं की मिलीभगत साफ नजर आती है। लाखों रुपये फूंककर जिस आजाद चौक फव्वारा क्षेत्र को शहर का मुख्य आकर्षण और राहगीरों के लिए राहत केंद्र बनना था, उसे आज पुलिस प्रशासन और नगर पालिका की नाक के नीचे अवैध पार्किंग का अड्डा बना दिया गया है। बाजार आने वाले लोग, राहगीर और वाहन चालक जो कुछ देर यहां रुककर गर्मी से राहत महसूस करते थे, वे अब इस अव्यवस्था के कारण जाम से जूझने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इस आधुनिक सिस्टम को महज कुछ ही दिनों में बंद हो जाना था, तो इसके मेंटेनेंस और संचालन की ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं बनाई गई? क्या इसका एकमात्र उद्देश्य केवल कागजी बिल पास कराकर मोटी कमीशनखोरी डकारना था? जागरूक नागरिकों की लगातार हो रही उपेक्षा अब जनाक्रोश में बदल रही है, जो सीधे तौर पर इस अवैध तंत्र और लापरवाह प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा है।
तीखे सवाल और पारदर्शी कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले में स्थानीय जागरूक नागरिकों ने अब सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन और नगर पालिका के मुख्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि आजाद चौक और नेहरू कॉलेज तिराहे पर यातायात व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया और इस ठप पड़े मिस्ट सिस्टम को नियमित रूप से चालू नहीं किया गया, तो शहर की सुंदरता और आकर्षण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। हमारे अखबार की पैनी नजर इस बात पर टिकी है कि खबर के इस बड़े असर के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल जांच का लॉलीपॉप थमाकर इस अवैध खेल को चलने देंगे, या फिर इस मिस्ट सिस्टम को तत्काल चालू करवाकर अवैध पार्किंग करने वाले रसूखदारों पर सख्त कानूनी हंटर चलाएंगे? जनता अब खोखले आश्वासनों से बहलने वाली नहीं है; उसे पाई-पाई का हिसाब चाहिए और इस लूट-खसोट के खिलाफ हमारा समाचार पत्र आखिरी अंजाम तक अपनी आवाज बुलंद रखेगा।
