क्या खाकी के संरक्षण में दफन कर दी गई 21 लाख की 'डील' और तीन जिंदगी?
Junaid Khan - शहडोल। जैतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कमता मोड़ पर बीते 13 अप्रैल की रात हुई दिल दहला देने वाली घटना ने अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर प्रशासनिक चुनौती का रूप अख्तियार कर लिया है। पूर्व में इस मामले को लेकर प्रकाशित हुई खबरों के बाद अब पूरे जिले का जनमानस आंदोलित है और पुलिस की 'सड़क दुर्घटना' वाली स्क्रिप्ट पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। मृतक रोहित शर्मा, तनुज शुक्ला और सचिन सिंह के परिजनों रानी द्विवेदी, लक्ष्मी शुक्ला और राजन सिंह ने पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) के समक्ष सीधे तौर पर जैतपुर थाना प्रभारी की भूमिका पर उंगली उठाकर खाकी के दामन को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। परिजनों का सीधा और रोंगटे खड़े कर देने वाला आरोप है कि यह महज कोई सड़क हादसा या कार पलटना नहीं था, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई जघन्य हत्या है, जिसे रसूखदार नशा तस्करों और स्थानीय पुलिस की जुगलबंदी ने मिलकर दबाने का घिनौना प्रयास किया है।
शवों पर चोट के निशान और 21 लाख की 'रहस्यमयी गुमशुदगी' ने खोली पोल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और सनसनीखेज मोड़ तब आया, जब पीड़ितों ने आरोप लगाया कि 13 अप्रैल की रात 10 से 12 बजे के बीच घटित इस वारदात की सूचना पुलिस ने जानबूझकर दबाए रखी और अगले दिन 14 अप्रैल की सुबह परिजनों को इत्तला दी गई। जब कुएं से तीनों युवकों के शवों को बाहर निकाला गया, तो उनके शरीरों पर गंभीर चोट और बर्बरतापूर्वक मारपीट के साक्ष्य साफ नजर आ रहे थे, जिसे छुपाने की नीयत से उन्हें कुएं में फेंका गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के वक्त कार में न सिर्फ गांजा लोड था, बल्कि 21 लाख रुपये की भारी-भरकम नगद राशि भी मौजूद थी, जिसे पुलिसिया कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर गायब या दबा दिया गया। मृतक रोहित शर्मा के परिजनों ने खुलासा किया है कि घटना से महज 4-5 दिन पहले एक वाहन को लेकर रोहित का किसी रसूखदार व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसकी शिकायत जैतपुर पुलिस से की गई थी, लेकिन पुलिस ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। यही अनदेखी अंततः तीन घरों के चिराग बुझने की वजह बन गई।
खाकी और नशा तस्करों का गठजोड़, CDR और टावर लोकेशन से होगा 'दूध का दूध और पानी का पानी'
प्रशासन और पुलिस के इकबाल को खुली चुनौती देते हुए पीड़ित परिवारों ने एक खूंखार गांजा तस्कर का नाम उजागर किया है, जिसके साथ जैतपुर थाना प्रभारी के बेहद मधुर और निरंतर संपर्क होने का दावा किया जा रहा है। मामले में निष्पक्ष न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि जैतपुर थाने के संबंधित अधिकारियों, इस संदिग्ध मामले से जुड़े रसूखदारों और नशा तस्करों के पिछले 10 दिनों के कॉल डिटेल (CDR) और टावर लोकेशन की बारीक जांच की जाए, तो पुलिस-तस्कर नेक्सस का वो खौफनाक चेहरा सामने आएगा जिससे पूरा प्रशासनिक अमला सन्न रह जाएगा। 'दैनिक प्रदेश सत्ता' इस पूरे मामले में प्रशासन को चेताता है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिशें अब कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि यह लड़ाई अब न्याय और खाकी की साख के बीच की बन चुकी है।
