अतिक्रमण हटाओ मुहिम के दौरान शानू ट्रांसपोर्ट के ट्रक चालक पर जानलेवा हमला
Junaid Khan - शहडोल ब्यौहारी। नक्षेत्र में व्यवस्था सुधारने के नाम पर चल रही प्रशासनिक मुहिम अब सरेआम खूनी संघर्ष और कानून को ठेंगा दिखाने का अखाड़ा बन चुकी है। पूर्व में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का ही यह व्यापक असर है कि सोए हुए प्रशासनिक अमले में खलबली मची है, लेकिन धरातल पर गुंडागर्दी और रसूखदारों का नंगा नाच थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा सनसनीखेज मामला ब्यौहारी नगर के व्यस्ततम इलाके से सामने आया है, जहां नगर पालिका परिषद के अमले द्वारा चलाई जा रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान अचानक दोपहर करीब १ बजे उस समय भारी बवाल, चीख-पुकार और दहशत का माहौल निर्मित हो गया, जब प्रसाद हार्डवेयर के समीप सीमेंट खाली करने पहुंचे शानू ट्रांसपोर्ट शाहडोल के एक ट्रक को हटाने की बात पर नपा कर्मियों और चालक के बीच विवाद खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। देखते ही देखते नगर पालिका की कार्रवाई का दायरा सिमट गया और सरेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ अराजक तत्वों ने आवेश में आकर चालक जयप्रकाश पटेल उर्फ देवा के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब पूरी तरह हिंसक हो चुकी भीड़ में से कुछ लोगों ने वाहन में रखे लोहे के भारी-भरकम 'टायर लीवर' जैसे जानलेवा हथियार से चालक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे चालक लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और ब्यौहारी का यह मुख्य मार्ग देखते ही देखते युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया।
कानून व्यवस्था व रसूखदारों को खुली चुनौती,आखिर कब तक मौन रहेगा तंत्र?
यह पूरी वारदात ब्यौहारी के स्थानीय प्रशासन,नगर पालिका की कार्यप्रणाली और अवैध गतिविधियों को शह देने वाले सफेदपोशों की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। प्रत्यक्षदर्शियों और आक्रोशित जनता का साफ कहना है कि यदि मौके पर पुलिस बल पहले से तैनात न होता और जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत मोर्चा नहीं संभाला होता, तो ब्यौहारी में एक आत्मघाती वारदात और बड़ा सांप्रदायिक या वर्ग-संघर्ष होना तय था। पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए न केवल आक्रोशित और उग्र हो चुकी भीड़ को खदेड़ा, बल्कि दोनों पक्षों को अलग कर घायल चालक को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि नगर पालिका की इस तथाकथित 'मुहिम' की आड़ में कानून हाथ में लेने वाले ये रसूखदार और हमलावर तत्व आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं? इस खूनी झड़प के बाद पूरे ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और स्थानीय व्यापारियों में गहरा और तीव्र आक्रोश व्याप्त है। ट्रांसपोर्ट संघ ने प्रशासन को दोटूक चेतावनी देते हुए दोषियों पर तत्काल सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि इस गुंडागर्दी पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
निष्पक्ष जांच का दावा या केवल लीपापोती की कोशिश? जनता मांग रही जवाब
इस पूरे घटनाक्रम के बाद भले ही पुलिस प्रशासन मुस्तैदी का दावा कर रहा है और अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्षता से बारीकी से जांच कर आगे की कठोर वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है, परंतु धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। एक तरफ नगर पालिका की टीम खुद को पाक-साफ बताने में जुटी है, तो दूसरी तरफ रसूखदारों के दबाव में मामले को रफा-दफा करने का बैकडोर खेल भी शुरू हो चुका है। २० साल के पत्रकारीय अनुभवों के आईने में यह साफ दिखाई देता है कि यह महज एक ट्रक चालक और कर्मचारियों की आपसी भिड़ंत नहीं है, बल्कि यह ब्यौहारी में पनप रहे उस संगठित सिंडिकेट और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है जो नियम-कायदों को अपनी जेब में रखकर चलते हैं। जनता अब प्रशासन से सीधा हिसाब मांग रही है कि सरकारी कार्रवाई के दौरान सरेआम जानलेवा हथियारों का उपयोग करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? क्या पुलिस और प्रशासन इन रसूखदारों के दबाव में घुटने टेक देगा या फिर इस बार विंध्य की धरती पर कानून का राज स्थापित करने के लिए कोई नजीर पेश की जाएगी? अखबार इस पूरे मामले की कड़ियां जुड़ने तक और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने तक इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाता रहेगा।
