युवती की अस्मिता से खिलवाड़: 'सूर्याकांत और आरती' ने आपसी रंजिश में पार की बदचलनी की हदें,शिकायत के बाद भी रेंग रहा सिस्टम
Junaid Khan - शहडोल। डिजिटल सुरक्षा के लंबे चौड़े दावों के बीच शहडोल संभाग से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिसिया चौकसी और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। इंटरनेट मीडिया पर बिना अनुमति के अश्लील फोटो और वीडियो अपलोड कर एक युवती की सामाजिक प्रतिष्ठा को तार-तार करने का एक घिनौना खेल सरेआम खेला जा रहा है। शहडोल जिले की रहने वाली पीड़ित युवती और अनूपपुर के एक युवक ने सीधे पुलिस महानिरीक्षक (IG) कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। पूर्व में इस खबर के मीडिया में आने के बाद पूरे संभाग में हड़कंप मच गया है और जनमानस में भारी आक्रोश है। इस खबर के व्यापक असर के बाद अब सीधे तौर पर प्रशासन की साख दांव पर लगी है कि वह इन बेलगाम डिजिटल अपराधियों पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर हर बार की तरह केवल कागजी घोड़े दौड़ाकर पल्ला झाड़ लिया जाएगा।
आपसी मतभेद का निकाला 'गंदा बदला',गाजियापुर से लेकर जमुना कालरी तक फैले तार
पीड़ितों द्वारा आईजी को सौंपे गए शिकायती पत्र में सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के गाजियापुर (चंदोल) निवासी सूर्याकांत बिंद और अनूपपुर की जमुना कालरी निवासी आरती बिंद को नामजद आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन दोनों ने आपसी मतभेद और पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए पीड़ितों के फोटो और वीडियो का घोर दुरुपयोग किया। आरोपियों ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर बिना अनुमति के इन तस्वीरों को गलत और आपत्तिजनक तरीके से संपादित (Edit) किया और इंस्टाग्राम समेत कई इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहुप्रसारित (वायरल) कर दिया। इस कृत्य ने न सिर्फ पीड़ितों की सामाजिक और मानसिक स्थिति को मटियामेट कर दिया है, बल्कि उन्हें आत्मघाती कदम उठाने जैसी गंभीर मानसिक प्रताड़ना के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
प्रशासन को खुली चुनौती,क्या सिर्फ एफआईआर के इंतजार में बैठा रहेगा अमला?
यह सीधे तौर पर शहडोल और अनूपपुर पुलिस के सूचना तंत्र और साइबर सेल को खुली चुनौती है कि अपराधी अंतर्राज्यीय स्तर पर नेटवर्क चलाकर स्थानीय नागरिकों की अस्मिता से खिलवाड़ कर रहे हैं और पुलिस लकीर पीट रही है। आईजी कार्यालय में शिकायत के बाद अब पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष, त्वरित और उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है। इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। देखना लाजमी होगा कि इस बड़ी खबर के राष्ट्रीय स्तर पर असर दिखाने के बाद, शहडोल पुलिस इन 'डिजिटल डकैतों' का दमन करने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है या पीड़ितों को इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।
