शहडोल में खाकी का खौफ खत्म,सिंहपुर रोड पर सरेराह खूनी संघर्ष,बेखौफ बदमाशों ने भांजी चाकुओं की धार

नींद से जागी पुलिस ने संदीप, शानू और साहिल पर दर्ज किया मुकदमा,लेकिन सुलगते सवाल अब भी बरकरार,क्या शहर में अवैध धंधेबाजों और सटोरियों को मिल रहा है मूक संरक्षण? 


Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में कानून-व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है, जिसका ताजा और खौफनाक उदाहरण बीती रात कोतवाली थाना क्षेत्र के सिंहपुर रोड पर देखने को मिला। पूर्व में इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप जरूर मचा और पुलिस ने आनन-फानन में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, लेकिन धरातल पर अपराधियों के हौसले आज भी बुलंद हैं। मिली जानकारी के अनुसार, सिंहपुर रोड पर दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर मामूली कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। बेखौफ दबंगों ने बीच सड़क पर धारदार चाकू निकालकर सरेआम हमला कर दिया। इस हिंसक वारदात में सिंहपुर रोड निवासी वीरेंद्र केवट (36 वर्ष) और वार्ड क्रमांक 29 निवासी अंशू यादव लहूलुहान हो गए। स्थानीय नागरिकों ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया और गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दी गई। गनीमत यह रही कि चाकू के वार जानलेवा साबित नहीं हुए, वरना शहर एक बड़ी अनहोनी का गवाह बन जाता। प्रशासन को सीधे चुनौती देता यह पूरा घटनाक्रम इस बात का गवाह है कि कोतवाली पुलिस का इकबाल अब अपराधियों के दिलों से पूरी तरह खत्म हो चुका है। पीड़ित वीरेंद्र केवट की शिकायत पर पुलिस ने पुट्ठा फैक्ट्री के पास रहने वाले संदीप यादव, शानू यादव और मतनी टोला निवासी साहिल कुशवाहा के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में तो ले लिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन असामाजिक तत्वों के पास खुलेआम चाकू जैसे घातक हथियार लहराने की हिम्मत कहां से आ रही है? सिंहपुर रोड, पुट्ठा फैक्ट्री और मतनी टोला जैसे क्षेत्र पिछले कुछ समय से अवैध गतिविधियों, सट्टेबाजी और नशे के कारोबार के अघोषित केंद्र बन चुके हैं। सूत्रों की मानें तो इन अपराधियों को स्थानीय स्तर पर कुछ सफेदपोशों और पुलिस के कुछ नुमाइंदों का परोक्ष संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते ये बेखौफ होकर रात के अंधेरे में अपनी हुकूमत चलाते हैं और आम नागरिकों का जीना मुहाल कर रखा है। अखबार की इस खोजी रिपोर्ट के माध्यम से हम सीधे शहडोल पुलिस प्रशासन को चुनौती देते हैं कि क्या वह केवल कागजी मुकदमा दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेगा, या फिर इन अपराधियों की रीढ़ तोड़ने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा? सरेराह चाकूबाजी की इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अगर पुलिस ने इन गुंडों, अवैध शराब और नशे के सौदागरों के खिलाफ अविलंब 'बुलडोजर' और सख्त धरपकड़ वाली कार्रवाई नहीं की, तो वह दिन दूर नहीं जब शहडोल की शांत वादियां अपराधियों के गैंगवार की भेंट चढ़ जाएंगी। अब देखना यह है कि नए तेवरों के साथ पुलिस कप्तान इन बदमाशों का जुलूस निकालते हैं या फिर हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में फाइल बंद कर दी जाएगी। जनता अब कोरे आश्वासनों से नहीं, बल्कि अपराधियों के सफाए से न्याय चाहती है।

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