बिजली चोरों और दबंगों पर अदालत का बड़ा हथौड़ा, 02 साल की जेल

न्यायालय ने दिखाया आईना, शासकीय कर्मचारी पर हमला करने वाले को 06 हजार अर्थदंड की सजा 


Junaid Khan - शहडोल। बुढ़ार कानून से खिलवाड़ करने वाले दबंगों, बिजली चोरों और शासकीय कार्य में अड़ंगा डालने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ अदालत ने एक नजीर पेश करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय बुढ़ार के जिला न्यायाधीश की अदालत ने शासकीय अमले से बदसलूकी, गाली-गलौज, मारपीट और खुलेआम बिजली चोरी करने के गंभीर मामले में आरोपी मो. इसरार अंसारी को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास और 06 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय के इस तल्ख फैसले ने साफ कर दिया है कि खुद को कानून से ऊपर समझने वाले गुंडों और भ्रष्ट मानसिकता के लोगों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। न्यायालय का यह फैसला न केवल ईमानदार शासकीय कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने वाला है, बल्कि उन आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के मुंह पर करारा तमाचा भी है जो प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को डरा-धमकाकर अपने अवैध कारनामों को अंजाम देने का दुस्साहस करते हैं। मामले की पूरी इबारत विभागीय ढिलाई और दबंगई के उस नंगे नाच की पोल खोलती है, जो 03 मार्च 2023 की रात करीब 09 बजे सामने आया था। कनिष्ठ मंत्री (यंत्री) सुखवदन विश्वकर्मा को सटीक सूचना मिली थी कि आरोपी मो. इसरार अंसारी पर बिजली बिल का 15 हजार 842 रुपए का भारी-भरकम बकाया होने के बावजूद वह अवैध रूप से सीधे कटिया मारकर बिजली चोरी कर रहा है। जब विद्युत विभाग की टीम मौके पर कार्रवाई करने पहुंची, तो अपनी करतूतों पर शर्मिंदा होने के बजाय आरोपी ने लोक सेवकों पर ही हमला बोल दिया। आरोपी ने न सिर्फ शासकीय कार्य में जानबूझकर बाधा उत्पन्न की, बल्कि अधिकारी-कर्मचारियों के साथ जमकर अश्लील गाली-गलौज करते हुए हाथापाई की। हालांकि, दबंगई के इस खेल पर नकेल कसते हुए मौके पर ही पंचनामा तैयार कर बुढ़ार थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया। अपर लोक अभियोजक आलोक राय की मजबूत पैरवी, सटीक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर माननीय अदालत ने यह स्पष्ट माना कि आरोपी ने एलटी लाइन से अवैध तार जोड़कर न सिर्फ राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी की, बल्कि ऑन-ड्यूटी लोक सेवक से मारपीट कर कानून को ठेंगा दिखाने का दुस्साहस किया। इस फैसले के बाद अब उन सिस्टम के दीमकों और चोरों में हड़कंप मच गया है, जो कार्रवाई करने जाने वाले कर्मचारियों पर दबाव बनाते थे। कानून के जानकारों का कहना है कि अगर हर मामले में इसी तरह त्वरित न्याय मिले, तो सरकारी महकमों में दादागिरी दिखाने वाले अपराधियों की रीढ़ पूरी तरह टूट जाएगी।

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