रोपे फलदार पौधे प्रशासन के 'हरित एवं गो-संवर्धन' अभियान को मिल रहा जनसहयोग,सामाजिक सहभागिता से संवर रहा शाहडोल अंचल का भविष्य
Junaid Khan - शाहडोल। (मध्य प्रदेश) विश्व पर्यावरण दिवस एवं पवित्र पुरुषोत्तम मास के इस पावन और दुर्लभ संयोग पर अंचल में आस्था, सेवा और प्रकृति संरक्षण का एक अद्भुत अनुष्ठान देखने को मिला है। स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे गो-संवर्धन और पर्यावरण बचाओ अभियान की जमीनी हकीकत अब धरातल पर रंग लाती दिख रही है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण 'पावन जागृति संस्था' के इस सराहनीय कदम में देखने को मिला। संस्था के सदस्यों ने अटल गौ सेवा केंद्र पहुंचकर बेसहारा गोवंश की सुध ली और उनके उत्तम स्वास्थ्य व पोषण के लिए भारी मात्रा में भूसा एवं गुड़ का समर्पण किया। सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास के दौरान गो-सेवा का विशेष महत्व है, और इस पावन वेला में मूक पशुओं के प्रति दिखाई गई यह संवेदनशीलता पूरे समाज के लिए एक प्रेरणापुंज बन गई है। इस सेवा कार्य की खास बात यह रही कि यहाँ केवल औपचारिकता नहीं निभाई गई, बल्कि प्रशासन के गो-शाला प्रबंधन के प्रयासों को संबल देते हुए संस्था ने सेवा का एक नया प्रतिमान स्थापित किया है। धरती के श्रृंगार और पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प। गो-सेवा के इस पावन अनुष्ठान के साथ ही संस्था ने 'हरित भविष्य' के राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाते हुए वृहद स्तर पर पौधारोपण भी किया। अटल गौ सेवा केंद्र परिसर में आम, जामुन, अमरूद जैसी प्रजातियों के फलदार पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का जिम्मा उठाया गया। वर्तमान समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और असंतुलित पर्यावरण एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं, ऐसे में प्रशासन के वृक्षारोपण अभियान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना समाज की सजगता को दर्शाता है। इस पुनीत अभियान का नेतृत्व कर रही पावन जागृति संस्था की संस्थापिका श्रीमती राखी शर्मा ने समाज का आह्वान करते हुए कहा कि, "गो-संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का नैतिक उत्तरदायित्व है। आइए, हम सब मिलकर इस अभियान में सहभागी बनें ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और समृद्ध भारत सौंप सकें।" इस सेवा और प्रकृति वंदन के अनुकरणीय कार्य में संस्था की ओर से श्रीमती राखी शर्मा, अंजना उदानिया, अदिति तिवारी, भारती गुप्ता, रेखा त्रिपाठी एवं पूजा श्रीवास्तव ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई और श्रमदान कर समाज में संवेदनशीलता का एक मजबूत संदेश प्रसारित किया।

