करगीरोड स्टेशन पर बड़ा रेल हादसा,रेलवे प्रशासन और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने दांव पर लगाई सैकड़ों जानें, मालगाड़ी के 03 डिब्बे बेपटरी

करगीरोड स्टेशन पर बड़ा रेल हादसा,रेलवे प्रशासन और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने दांव पर लगाई सैकड़ों जानें, मालगाड़ी के 03 डिब्बे बेपटरी


Junaid Khan - शहडोल। अनूपपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत करगीरोड रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने रेल यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बीती 13 जुलाई की दोपहर 02:20 बजे, नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर प्लेटफॉर्म नंबर 02 से भारी-भरकम जेसीबी बकेट (JCB Bucket) को ट्रैक पार कराकर प्लेटफॉर्म नंबर 01 पर ले जाया जा रहा था। इसी घोर लापरवाही के बीच अचानक आई एक खाली मालगाड़ी इस बकेट से टकरा गई, जिसके चलते मालगाड़ी के 03 डिब्बे पटरी से उतर गए और स्टेशन पर चीख-पुकार मच गई। गनीमत यह रही कि यह टक्कर एक मालगाड़ी से हुई; अगर इसकी जगह कोई खचाखच भरी यात्री ट्रेन होती, तो सैकड़ों निर्दोषों की जान जा सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे वेंडरों, ठेकेदारों और रसूखदारों का एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है, जो चंद रुपयों के लालच में नियमों को ठेंगे पर रखता है। रेलवे स्टाफ द्वारा नियमों की अनदेखी और स्टेशन प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण ही यह बड़ा हादसा आकार ले सका।

इस पूरे काले कारोबार और लापरवाही के सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अब तक 10 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि शहडोल के रहने वाले 21 वर्षीय अभिषेक यादव ने इंदौर से ट्रेन संख्या 18233 नर्मदा एक्सप्रेस के जरिए यह भारी-भरकम जेसीबी बकेट करगीरोड के लिए भेजी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नर्मदा एक्सप्रेस के ए-1 कोच के अटेंडेंट मोहम्मद समीर (24) ने नियमों के विरुद्ध जाकर इस भारी सामान को गंतव्य तक पहुंचाने की 'सुपारी' ली थी, जो रेल सुरक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस अवैध खेप को मंगवाने वाला अनूपपुर जिले के करपा निवासी रेलवे का प्राइवेट ठेकेदार पवन नायक है, जो हादसा होते ही मौके से रफूचक्कर हो गया और RPF उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है। पकड़े गए अन्य आरोपियों में कमलेश टेकाम, मुन्ना (24), नरहर सिंह पिंटू (34), देवा सिंह मुन्ना (38), बुद्धू सिंह (49), छत्रपति मरावी (32), लोकेश मांडवी (19), अनुराग मरावी (31), और अमित यादव (23) शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए इन मजदूरों और बिचौलियों ने खुलासा किया है कि स्टेशन परिसर में बिना किसी ब्लॉक या आधिकारिक अनुमति के, नियम विरुद्ध तरीके से सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा रहा था। जब ट्रेन सामने आ गई, तो अपनी जान बचाने के लिए ये मजदूर बकेट को ट्रैक पर ही छोड़कर भाग खड़े हुए। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की लचर मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को सीधी चुनौती है कि कैसे प्रतिबंधित और भारी सामान पैसेंजर ट्रेनों के जरिए धड़ल्ले से ढोया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद सो रहे हैं।

Previous Post Next Post