शहडोल में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,राम मंदिर से पंचायती मंदिर तक गूंजा 'जय जगन्नाथ' का उद्घोष, पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य के साथ निभाया समर्पण का संकल्प
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल नगर में गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ जी की पावन रथ यात्रा पूरी श्रद्धा, अटूट भक्ति और अभूतपूर्व उत्साह के साथ निकाली गई। श्री राम मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई यह भव्य यात्रा जब पंचायती मंदिर पहुंची, तो वहां विधि-विधान से की गई महाआरती के साथ इसका समापन हुआ। इस दौरान भगवान श्री जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और माता सुभद्रा के दिव्य स्वरूपों के दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के कंठ से निकले "जय जगन्नाथ" के जयघोष और सुमधुर भजनों से समूचा नगर गुंजायमान रहा। जगह-जगह पर पुष्पवर्षा कर रथ यात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया, तो वहीं सामाजिक संगठनों और नगरवासियों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व महाप्रसाद की व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। इस अलौकिक आयोजन ने शहडोल की समृद्ध धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को एक बार फिर रेखांकित किया, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने शीश नवाकर प्रदेश व देश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की मंगल कामना की।
कर्तव्य पथ पर 'आस्था की छांव'जब वर्दीधारियों ने हाथों में थामी महाप्रभु के रथ की डोरी
इस भव्य आयोजन की सबसे हृदयस्पर्शी और अविस्मरणीय तस्वीर तब सामने आई, जब सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही खाकी ने अपनी रक्षक की भूमिका से आगे बढ़कर 'भक्त' का रूप धारण कर लिया। आम तौर पर त्योहारों और आयोजनों में सुरक्षा घेरा बनकर खड़े रहने वाले पुलिसकर्मी इस बार स्वयं को महाप्रभु की भक्ति से दूर नहीं रख सके। चिलचिलाती धूप, उमस और बारिश की बूंदों के बीच अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभाते हुए कोतवाली पुलिस, यातायात पुलिस और पुलिस अधीक्षक कार्यालय से आई विशेष टीमों के जांबाज अधिकारियों व जवानों ने एक अनूठी मिसाल पेश की। सभी विंग के जवानों ने एक सूत्र में बंधकर न केवल सुरक्षा का अभेद्य कवच तैयार किया, बल्कि श्रद्धाभाव से ओत-प्रोत होकर महाप्रभु जगन्नाथ के रथ की विशाल रस्सियों को अपने हाथों में थाम लिया। पुलिस बल के जवानों ने काफी दूर तक रथ को खींचा, भगवान के श्रीचरणों में पूरी आस्था के साथ प्रसाद चढ़ाया, प्रार्थना की और देश-प्रदेश के कल्याण की दुआएं मांगी।
त्योहारों से दूर रहने वाली खाकी ने निभाया 'फर्ज और धर्म' का अनोखा रिश्ता
यह अद्भुत दृश्य समाज को एक बेहद गहरा और सकारात्मक संदेश दे गया। 24 घंटे जनता की सेवा में तत्पर रहने वाले पुलिसकर्मी, जो अक्सर अपने परिवार, बच्चों और अपनों के साथ त्योहार मनाने की खुशियों से वंचित रह जाते हैं, उन्होंने इस बार अपनी अंतरात्मा की पुकार को सुना। उन्होंने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर भी एक संवेदनशील और आस्थावान दिल धड़कता है। विपरीत मौसम और भारी भीड़ के बीच पानी और पसीने से तर-बतर होने के बावजूद, पुलिस टीम ने अपने राजकीय 'फर्ज' (ड्यूटी) और सामाजिक 'कर्ज' के साथ-साथ अपने व्यक्तिगत 'धर्म' का भी पूरी शिद्दत से निर्वहन किया। ड्यूटी की सीमाओं को लांघकर आस्था के सफर में हमकदम बने पुलिस प्रशासन के इस अभिनव प्रयास की पूरे नगर में मुक्तकंठ से सराहना हो रही है। खाकी का यह मानवीय और भक्तिमय चेहरा लंबे समय तक शहडोलवासियों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ गया।
