भ्रष्टाचार का 'इलाज' करने वाले खुद 'बीमार,जयसिंहनगर में लोकायुक्त का बड़ा धमाका,

PHC का मेडिकल ऑफिसर रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा मरीजों की सेवा छोड़ साहब वसूल रहे थे 'सेवा शुल्क' 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल संभाग के स्वास्थ्य महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब शुचिता और सेवा का दम भरने वाले एक जिम्मेदार चिकित्सा अधिकारी का असली चेहरा बेनकाब हो गया। लोकायुक्त पुलिस रीवा ने एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम देते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) उफरी, जयसिंहनगर के मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई जयसिंहनगर बस स्टैंड पर सरेआम हुई, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर स्वास्थ्य विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जनता के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले जब खुद भ्रष्टाचार के 'इलाज' में लग जाएं, तो तंत्र सुधरेगा कैसे? यह कार्रवाई उन तमाम लापरवाह और मदांध अधिकारियों के लिए एक खुली चुनौती है जो सरकारी कुर्सी को निजी कमाई का जरिया मान बैठे हैं।

सिस्टम को दी चुनौती,10 हजार की थी डिमांड, धारा 7 के तहत शिकंजा

पूरा मामला विभागीय ट्रांसफर-पोस्टिंग और रवानगी की आड़ में चल रहे खेल से जुड़ा है। सूत्रों से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, आरोपी मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा संलग्नीकरण (अटैचमेंट) आदेश को निरस्त कराने और शिकायतकर्ता को रवानगी न देने के एवज में लगातार 10 हजार रुपए की मोटी रिश्वत की मांग कर रहे थे। परेशान शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने के बजाय रीवा लोकायुक्त पुलिस के पास इसकी लिखित शिकायत दर्ज करा दी। लोकायुक्त की टीम ने बिना वक्त गंवाए जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी डॉक्टर ने पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपए थामे, वैसे ही टीम ने उन्हें धर दबोचा। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी डॉ. महेश चंद्र शर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन अधिनियम 2018) की धारा 7 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया है। यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि खाकी और कानून की नजर से कोई भी भ्रष्टाचारी बच नहीं सकता, चाहे उसका ओहदा कितना ही बड़ा क्यों न हो।

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