एसडीएम भवन के सामने 'मौत की क्लिनिक': झोलाछाप के गलत इलाज से 80 वर्षीय वृद्धा की बिगड़ी तबीयत, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस मौन
Junaid Khan - शहडोल। जिले में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और पुलिस-प्रशासनिक तंत्र की मूक सहमति से झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक चरम पर पहुँच चुका है। जिला मुख्यालय के अति संवेदनशील और वीआईपी इलाके में, जहां एसडीएम कार्यालय (SDM भवन) स्थित है, ठीक उसी के सामने बेखौफ होकर मौत का काला धंधा चलाया जा रहा है। मामला स्टेडियम रोड, सुहागपुर गढ़ी के पास रमाकांत पान सेंटर के पीछे का है, जहाँ कथित झोलाछाप डॉक्टर शेख सत्तार मंसूरी नामधारी व्यक्ति द्वारा गैरकानूनी तरीके से क्लिनिक चलाकर निर्दोष लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। ताजा पीड़ित मामला स्टेडियम रोड निवासी 80 वर्षीया असहाय वृद्धा झल्ला पाल का है। वृद्धा जब मामूली अस्वस्थता के कारण इस झोलाछाप के पास पहुँची, तो उसने बिना किसी वैध डिग्री और जांच के अंधाधुंध दवाइयाँ ठोंक दीं। गलत इलाज का दुष्परिणाम यह हुआ कि बुजुर्ग महिला की तबीयत सुधरने के बजाय बेहद क्रिटिकल (अति गंभीर) हो गई। दवा के जहरीले रिएक्शन से वृद्धा को दिन में 10-10 बार दस्त (शौच), हाथ-पैरों में भयानक सूजन, शरीर में असहनीय जलन और तेज चक्कर आने लगे। जिंदगी और मौत से जूझ रही पीड़ित बुजुर्ग महिला को जब स्थिति बिगड़ने पर एक समाज सुधारक का सहारा मिला, तब जाकर उनके ही घर पर सही उपचार शुरू करवाया जा सका और किसी तरह उनकी जान बचाई जा सकी। होश संभालने और स्थिति में थोड़ा सुधार आने के बाद, हिम्मत जुटाकर 80 साल की यह लाचार वृद्धा न्याय की गुहार लगाने के लिए स्वयं जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के दफ्तर पहुंची और लिखित शिकायत दर्ज कराई। लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि एसडीएम कार्यालय के ठीक नाक के नीचे यह अवैध क्लीनिक महीनों से कैसे संचालित हो रही थी? क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों और स्थानीय पुलिस को इस अवैध धंधे की खबर नहीं थी? या फिर हर महीने पहुँचने वाले कथित "नज़रानों" के दम पर इन कातिल झोलाछापों को विभाग का अभयदान और संरक्षण प्राप्त है? यदि समाज सुधारक सही समय पर मदद न करते तो इस लापरवाही के कारण बुजुर्ग महिला की जान भी जा सकती थी, जिसका सीधा जिम्मेदार यह झोलाछाप डॉक्टर और उसे संरक्षण देने वाला स्वास्थ्य महकमा होता। इस खौफनाक घटना ने जिले की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ करने वाले ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर आखिर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई की गाज क्यों नहीं गिरती? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी और मौत का इंतजार कर रहा है? पीड़ित 80 वर्षीया झल्ला पाल को न्याय दिलाने और जिले भर में सक्रिय झोलाछापों के गिरोह पर लगाम लगाने के लिए अब जन-आक्रोश सुलग रहा है। समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने पुरजोर मांग की है कि कथित झोलाछाप शेख सत्तार मंसूरी पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर उसे जेल भेजा जाए, उसकी अवैध दुकान सील की जाए और उन लापरवाह स्वास्थ्य अधिकारियों पर भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए जो इन नीम-हकीमों को संरक्षण दे रहे हैं। यदि पीड़ित वृद्धा को अविलंब न्याय नहीं मिला, तो जल्द ही कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।
