वृद्ध महिला के बैंक खातों में बड़ी सेंधमारी,महाराज पर सवा दो लाख हड़पने का आरोप

नायब तहसीलदार अदालत ने थमाया कानूनी नोटिस, 30 जुलाई तक जवाब न देने पर दर्ज होगी FIR


Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर क्षेत्र में सीधे-साधे और अनपढ़ ग्रामीणों को झांसे में लेकर उनकी गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले ठगों का गिरोह सक्रिय है। फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला और गंभीर मामला सोहागपुर तहसील के नायब तहसीलदार न्यायालय (वृत्त अमराहा) में सामने आया है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर हो रही ठगी की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस व प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। प्रार्थी राजू सिंह पिता कुंदेललाल सिंह (निवासी केलमनिया, थाना सिंहपुर, जिला शहडोल) ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती आवेदन दिया है कि बंधवाबड़ा (थाना कोतवाली, शहडोल) निवासी आरोपी अरुण द्विवेदी पिता गोविन्द प्रसाद द्विवेदी (उर्फ महाराज) ने उनकी वृद्ध माता रामकली को बहला-फुसलाकर और झांसे में लेकर विभिन्न बैंकों के चक्कर लगवाए। आरोपी द्वारा सेंट्रल मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शहडोल की शाखाओं में ले जाकर बिना कुछ बताए व बिना सहमति के फर्जी तरीके से लाखों रुपए पार कर दिए गए। पीड़ित परिवार के अनुसार, आरोपी 'महाराज' ने योजनाबद्ध तरीके से ग्रामीण बैंक के खाते से 80,000 रुपए, स्टेट बैंक के खाते से 50,000 रुपए तथा पंजाब नेशनल बैंक के खाते से 1,00,000 रुपए (कुल मिलाकर 2 लाख 30 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि) चुपचाप निकाल लिए। इस पूरी धोखाधड़ी और खातों के सफाए की भनक पीड़ित परिवार को तब लगी, जब वे गत 07 जुलाई 2026 को किसी कार्यवश बैंक पहुंचे और खाते का बैलेंस जांचा। बैंक खातों से रकम गायब देखकर पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई। मामले में राजस्व न्यायालय नायब तहसीलदार वृत्त अमराहा द्वारा 20 जुलाई 2026 को आरोपी अरुण द्विवेदी को कड़ा नोटिस जारी करते हुए 30 जुलाई 2026 को अदालत में उपस्थित होकर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने का अंतिम आदेश दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित तिथि तक जवाब न देने या अनुपस्थित रहने की स्थिति में आरोपी के विरुद्ध तत्काल थाने में आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराया जाएगा। शासकीय महकमों और पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आखिर कैसे कोई व्यक्ति एक वृद्ध और असहाय महिला को तीन अलग-अलग राष्ट्रीयकृत बैंकों में ले जाकर इतनी बड़ी रकम फर्जी तरीके से निकाल लेता है और बैंक प्रबंधन या स्थानीय तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगती? बैंकों की सुरक्षा प्रणाली और अंगूठा/हस्ताक्षर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर भी संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ऐसे शातिर ठगों पर समय रहते सख्त नकेल कसने के बजाय कागजी औपचारिकताओं में समय गंवाता है, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद होते हैं। यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो ठगी का यह खेल कई और निर्दोष ग्रामीणों को अपना शिकार बना लेगा।

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