खाकी पर खाकी का दाग, खाकी का खौफ और 1 लाख की 'वसूली',फिर फंदे पर झूला बेबस युवक

साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की जुगलबंदी से उजड़ा परिवार,उच्चस्तरीय जांच, निलंबन और कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़े ग्रामीण 


Junaid Khan - शहडोल। सँभाग के जिले अनुपपुर के थाना कोतमा क्षेत्र के ग्राम लेदरा में एक 33 वर्षीय युवक कोमल सिंह उर्फ केवलु (पिता मना सिंह) की खुदकुशी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतक छिड़ीमिड़ी से आकर हाल ही में लेदरा में अपना मकान बनाकर रह रहा था। परिजनों ने जबलपुर साइबर सेल और रामनगर/कोतमा पुलिस के कुछ कर्मचारियों पर अति-गंभीर आरोप लगाते हुए सीधा आरोप लगाया है कि जबर्दस्ती जेल भेजने की धमकी दी गई और ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) ऐंठने के बाद ही उसे छोड़ा गया। इस मानसिक उत्पीड़न और खाकी के आतंक से टूटकर पीड़ित ने अपने ही कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना के बाद से ही पूरे अंचल में भारी जनाक्रोश व्याप्त है और पुलिस-प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। मामले के अनुसार, जबलपुर साइबर सेल की टीम आईटी एक्ट के एक प्रकरण की विवेचना के सिलसिले में स्थानीय पुलिस स्टाफ के साथ ग्राम छिड़ीमिड़ी पहुंची और कोमल सिंह को उठा लिया। इसके बाद रामनगर/राजनगर थाने में घंटों बिठाकर रखा गया, जहां उसे जबलपुर जेल भेजने का डर दिखाकर एक भारी-भरकम राशि की मांग की गई। परिजनों का दावा है कि पीड़ित के बड़े भाई वीरसिंह ने किसी तरह जोड़-तोड़ कर ₹1 लाख का इंतजाम किया और संबंधितों के हवाले किया। पैसे वसूलने के बाद युवक का मोबाइल फोन जब्त कर औपचारिक कागजी कार्रवाई के नाम पर जमानत देकर छोड़ा गया। सोमवार को परिवार के साथ घर लौटने के बाद सदमे में डूबे युवक ने मंगलवार को फांसी लगाकर जान दे दी।

घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और औपचारिकताएं शुरू की हैं। जन दबाव और परिजनों के तीखे आरोपों के बीच रामनगर थाने के प्रधान आरक्षक निरंजन खलको को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है, किंतु क्षेत्र की जनता और प्रबुद्ध वर्ग इसे मात्र 'लीपापोती' मान रहा है। जब आरोपी दल में जबलपुर साइबर सेल और स्थानीय पुलिसकर्मी दोनों शामिल थे, तो कार्रवाई केवल एक निचले स्तर के कर्मचारी तक ही सीमित क्यों? क्या केवल निलंबन इस गैर-कानूनी वसूली और उकसावे की भरपाई कर सकता है? जनता अब सीधे गृह विभाग, उच्च पुलिस अधिकारियों और राज्य सरकार से निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने तथा मृतक के पीड़ित परिवार को न्याय व मुआवजा देने की मांग कर रही है।

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