नौनिहालों की सुरक्षा पर भारी पड़ा प्रशासनिक अमला,स्कूल से लेकर सड़क तक मची अफरा-तफरी

शिक्षा विभाग की लापरवाही से विद्यालय परिसर में घुसा शराबी उपद्रवी,पुलिस की कार्यशैली और राष्ट्रीय राजमार्ग पर मवेशियों की मौतों से शासन-प्रशासन के दावों की खुली पोल


Junaid Khan - शहडोल। प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि न तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम नौनिहाल सुरक्षित हैं और न ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेजुबान मवेशी व राहगीर। बुढ़ार थाना क्षेत्र के दमकी टोला स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय से सामने आई घटना ने शिक्षा विभाग, स्थानीय पुलिस तथा जिला प्रशासन की मुस्तैदी पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। सोमवार दोपहर जब मासूम बच्चे कक्षाओं में शांतिपूर्वक पढ़ाई कर रहे थे, तभी शराब के कड़े नशे में धुत्त एक मनचला युवक बेधड़क स्कूल परिसर के अंदर घुस आया और सीधे कक्षा में पहुंचकर अश्लील व अजीबोगरीब हरकतें करते हुए उत्पात मचाने लगा। इस सिरफिरे की हरकतों से न न केवल नन्हे-मुन्ने बच्चे बुरी तरह डरकर सहम गए, बल्कि पूरा विद्यालय स्टाफ भी दहशत के साये में आ गया। सवाल यह उठता है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) आखिर सुरक्षा के नाम पर कौन सा बजट खर्च कर रहे हैं, जब प्राथमिक स्कूलों में बाउंड्रीवॉल और सुरक्षा प्रहरी तक के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं?

पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल,सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप

घटना की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय के शिक्षकों ने तत्काल डायल-112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची बुढ़ार पुलिस की टीम जब आरोपी युवक को स्कूल से बाहर निकालने का प्रयास करने लगी, तो आरोपी पुलिसकर्मियों से ही उलझ गया और भागने की कोशिश करने लगा। यद्यपि पुलिस ने उसे कड़ी मशक्कत के बाद धर दबोचा, लेकिन इसके बाद जो दृश्य सामने आया उसने कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली की साख पर बट्टा लगा दिया। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो में पुलिसकर्मी सरेआम पुलिस वाहन के पास उक्त युवक को लाठियों-डंडों से पीटते हुए नजर आ रहे हैं। इस तालिबानी रवैये के बाद एक तरफ जहां अभिभावक स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश में हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग की इस सरेआम पिटाई ने भी महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का रटा-रटाया बयान सामने आया है कि वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी, परंतु सवाल वहीं का वहीं है कि क्या इस तरह की फजीहत के बाद ही पुलिस और शिक्षा महकमा जागेगा? हाईवे पर लगातार खून बहा रहे बेजुबान, नेशनल हाईवे-43 बना 'हादसों का कॉरिडोर। प्रशासनिक लापरवाही का आलम केवल सरकारी स्कूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर भी मौत का तांडव जारी है। शहडोल-बुढ़ार नेशनल हाईवे-43 पर एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां अज्ञात भारी वाहन ने सड़क पर बैठे दो बेजुबान मवेशियों को बेरहमी से कुचल दिया। हादसा इतना विभत्स था कि दोनों मवेशियों ने मौके पर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर मवेशियों का जमावड़ा और आए दिन हो रही मौतें एनएचएआई (NHAI), नगर पालिका और पशुपालन विभाग के दावों का ढोंग उजागर कर रही हैं। राजमार्गों पर रात-दिन दौड़ते अनियंत्रित वाहन न केवल बेजुबान जानवरों की बलि ले रहे हैं, बल्कि दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों के लिए भी काल साबित हो रहे हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासन आवारा मवेशियों को कांजी हाउस या गौशाला भेजने की ठोस व्यवस्था कर रहा है और न ही ओवरस्पीडिंग पर नकेल कसी जा रही है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते स्कूल परिसरों की सुरक्षा और हाईवे की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो जनता का सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है।

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