बाणसागर बांध में जलभराव 93 प्रतिशत के पार,प्रशासन अलर्ट मोड पर, निचले इलाकों के लिए सतर्कता की अपील

जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी से जल प्रबंधन दुरुस्त, क्षेत्रवासियों के चेहरे खिले, सतर्क रहने के निर्देश


Junaid Khan - शहडोल। जिले के जीवनदायिनी और संभाग के सबसे महत्वपूर्ण बाणसागर बांध में इस मानसून सत्र के दौरान जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और बांध अब अपने पूर्ण भराव क्षमता (फुल रिजर्वायर लेवल) के बेहद करीब पहुंच गया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बांध में जलभराव लगभग 92.89 प्रतिशत (लगभग 93%) तक पहुंच चुका है। प्रशासन की त्वरित निगरानी और बेहतर जल प्रबंधन व्यवस्था के चलते फिलहाल बांध के सभी रेडियल गेट पूरी तरह बंद रखे गए हैं, जिससे क्षेत्र में जल संतुलन पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार एवं जिला प्रशासन की दूरदर्शिता और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की निरंतर मुस्तैदी से जहां एक ओर खुशहाली की नई उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए तटीय व निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

जल संसाधन विभाग से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह 8:00 बजे तक बाणसागर का जलस्तर 341.35 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका अधिकतम (पूर्ण) जलाशय स्तर 341.64 मीटर निर्धारित है। यानी अब बांध को लबालब भरने में महज 0.29 मीटर का ही अंतर रह गया है। वर्तमान में बांध में 5043.91 एमसीएम (MCM) लाइव स्टोरेज मौजूद है। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले वर्ष 28 अगस्त को जलस्तर 341.57 मीटर था, जिससे स्पष्ट है कि इस वर्ष भी जल स्थिति बेहद अनुकूल और संतुलित है। जलाशय में वर्तमान में 715.10 क्यूमेक पानी की निरंतर आवक बनी हुई है। वहीं, नियंत्रित जल प्रबंधन के तहत कुल निकासी 134.66 क्यूमेक ही की जा रही है, जिसमें पावरहाउस फेज-3 से 57.66 क्यूमेक, एचआर से 70 क्यूमेक, आरबीसी से 1 क्यूमेक, भिटरी से 1 क्यूमेक तथा वाष्पीकरण के माध्यम से 5 क्यूमेक पानी शामिल है।मुस्तैद प्रशासन और सतर्क जनता की मिसाल, विभागीय अधिकारी 24 घंटे तैनात इस अभूतपूर्व स्थिति में जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली की सर्वत्र सराहना हो रही है। विभागीय अधिकारियों एवं प्रशासनिक अमले ने स्थिति पर चौबीसों घंटे नज़र बनाए रखी है। कार्यपालन यंत्री (EE) एस.के. शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बांध में पानी की आवक लगातार जारी है। यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश इसी गति से होती रही, तो सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए आने वाले समय में स्पिलवे के रेडियल गेट खोलने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि आसपास के तटीय गांवों और निचले क्षेत्रों में मुनादी व अलर्ट के ज़रिए लोगों को पहले से ही सचेत किया जा रहा है। प्रशासन के इस त्वरित अलर्ट सिस्टम और समन्वय की बदौलत आम जनता भी पूरी जागरूकता और समझदारी का परिचय दे रही है। नदी-नालों और संवेदनशील तटीय क्षेत्रों से दूरी बनाकर जनता प्रशासन का पूरा सहयोग कर रही है। अब तक क्षेत्र में कुल 716.71 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है (सुबह 8 बजे तक 3.04 मिमी दर्ज)। शासन और प्रशासन की इस सजगता ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी संभावित प्राकृतिक स्थिति से निपटने के लिए मध्य प्रदेश शासन का अमला पूरी तरह प्रतिबद्ध और सक्षम है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और आधिकारिक निर्देशों का पालन करते हुए सतर्क एवं सुरक्षित रहें।

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