मुआवजे के बाद भी रोजगार को तरसे विस्थापित, ठेका कंपनी की मनमानी पर मौन साधे बैठा प्रशासन

रामपुर बुढ़ार ओसीपी में स्थानीय युवाओं की अनदेखी और वाहन स्वामियों के आर्थिक शोषण से गहराया असंतोष, बकहो नगर कांग्रेस ने कलेक्टर से की सीधी शिकायत, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी 


Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर एरिया अंतर्गत संचालित एसईसीएल की रामपुर बुढ़ार ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (ओसीपी) में अपनी कीमती जमीनें गंवा चुके भू-स्वामी आज अपनी ही माटी पर हक और रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं। कोयला उत्खनन के लिए शासन-प्रशासन के वादों पर भरोसा कर ग्राम अंतरीया, बिछिया, बुढ़ार और खैरवना के किसानों ने अपनी उपजाऊ भूमि अधिग्रहित कराई थी। मुआवजा बांटकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर चुके प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक वर्ष पूर्व डीआरसीसी (DRCC) की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद प्रभावित किसान परिवारों के पात्र युवाओं को आज तक रोजगार की मुख्यधारा से बाहर रखा गया है। जिम्मेदार अधिकारी, क्षेत्र के जन प्रतिनिधि, विधायक और सांसद स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करने के बजाय ठेका कंपनियों के आगे घुटने टेके नजर आ रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की इस आपराधिक खामोशी और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ बकहो नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जवाहर लाल रैक ने जनता की आवाज बनते हुए कलेक्टर के नाम एक कड़ा शिकायत पत्र सौंपा है और आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। माइंस क्षेत्र में कार्यरत ठेका कंपनी जय अम्बे रोड लाइंस प्राइवेट लिमिटेड की मनमानी और स्थानीय हितों पर डाका डालने का खेल चरम पर है। सरकारी नियमों और नीतियों को दरकिनार कर कंपनी द्वारा क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार देने में खुलेआम पक्षपात किया जा रहा है। एक तरफ जहां स्थानीय योग्य युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजगार की आस में बैंक से कर्ज लेकर कंपनी में वाहन लगाने वाले स्थानीय वाहन मालिकों को बीते तीन से चार महीनों से भुगतान तक नहीं किया गया है। 24 घंटे अनवरत चलने वाली माइंस में एक-एक वाहन पर दो-दो चालकों से काम लिया जा रहा है, लेकिन उनके मासिक वेतन भुगतान में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। कर्ज की किस्तें चुकाने में नाकाम वाहन चालक और मालिक भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। इस शोषण चक्र के खिलाफ बकहो नगर कांग्रेस कमेटी ने स्थानीय जनता, प्रभावित किसानों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया है। प्रशासनिक लापरवाही और ठेका कंपनी की हठधर्मिता के खिलाफ जन-आक्रोश लगातार सुलग रहा है। पीड़ित परिवारों द्वारा लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें केवल खोखले आश्वासनों का झुनझुना थमाया जा रहा है, जिससे प्रभावित परिवारों के बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूबता जा रहा है। नगर कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यदि विस्थापित किसानों को उनका हक, युवाओं को रोजगार और वाहन मालिकों का बकाया भुगतान तत्काल नहीं किया गया, तो क्षेत्र की पीड़ित जनता को साथ लेकर उग्र धरना-प्रदर्शन, आंदोलन और आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन किया जाएगा। यदि स्थिति बिगड़ती है तो इसकी पूरी जवाबदेही शासन, जिला प्रशासन, क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों और एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

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