प्रशासन,खाद्य विभाग और गैस एजेंसियों की घोर लापरवाही उजागर, जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान
Junaid Khan - शहडोल। बुढ़ार थाना क्षेत्र स्थित होटल बिलासा में गुरुवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब होटल के किचन में रखे गैस सिलेंडर में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते किचन से विकराल आग की लपटें उठने लगीं, जिससे होटल में मौजूद कर्मचारियों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। संभावित बड़े हादसे और सिलेंडर विस्फोट की आशंका से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया, जिसके बाद तुरंत लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों की तत्परता से आग पर समय रहते काबू पाया गया, जिससे एक भीषण हादसा टल गया। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल सका है, हालांकि प्रारंभिक जांच में सिलेंडर रिसाव को वजह माना जा रहा है। पुलिस और संबंधित विभाग अब आगजनी से हुए नुकसान का आकलन करने के साथ घटना की विस्तृत जांच में जुट गए हैं।
जिम्मेदारों की मूक सहमति,सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चल रहे प्रतिष्ठान
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के तंत्र की घोर लापरवाही का नतीजा है। शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और होटलों में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन न होना और एनओसी (NOC) के बिना व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना अब आम बात हो चुकी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food Safety Department) की लापरवाही का आलम यह है कि बिना किसी सुरक्षा जांच और मानकों की पड़ताल के प्रतिष्ठानों को हरी झंडी दे दी जाती है। वहीं, गैस सिलेंडर आपूर्ति से संबंधित विभाग और एजेंसियां भी इस खेल में बराबर की भागीदार हैं, जो व्यावसायिक स्थलों पर सिलेंडरों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
जनता की सुरक्षा से खिलवाड़, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
होटल संचालकों और कर्मचारियों की लापरवाही का यह आलम है कि वे महज अपने मुनाफे के लिए दर्जनों लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। किचन में सुरक्षा उपायों का न होना, कर्मचारियों को अग्नि-सुरक्षा का प्रशिक्षण न देना और गैस तंत्र के रखरखाव में कोताही बरतना सीधी आपराधिक लापरवाही है। अगर दमकल टीम की तत्परता से आग पर काबू न पाया जाता, तो एक बड़ा विस्फोट पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले सकता था। सवाल यह उठता है कि आखिर शासन-प्रशासन ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों और लापरवाह संचालकों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं करता? क्या संबंधित विभाग किसी बड़े विनाशकारी हादसे का इंतजार कर रहे हैं? क्षेत्रीय जनता ने मांग की है कि ऐसे तमाम होटलों की तत्काल जांच कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
