रेलवे कॉलोनी में बेखौफ चोरों का तांडव,पुलिस गश्त और सुरक्षा दावों की खुली पोल, खाकी की सुस्ती से आमजन में भारी आक्रोश
Junaid Khan - शहडोल। एक तरफ जहाँ आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई और मेहनत के पैसों से अपने आशियाने को सुरक्षित मानकर अपनों के इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ खाकी की ढीली गश्त और लचर व्यवस्था के चलते चोरों के हौसले बुलंद हैं। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रेलवे कॉलोनी से चोरी की एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में डर और पुलिसिया कार्यप्रणाली के खिलाफ भारी आक्रोश का माहौल बना दिया है। गंभीर बीमारी से जूझ रही अपनी बुजुर्ग माँ का इलाज कराने के लिए पीड़ित परिवार जब महज कुछ घंटों के लिए घर में ताला लगाकर अस्पताल गया, तभी सूने मकान को निशाना बनाकर बेखौफ अपराधियों ने लाखों रुपये के जेवरातों और नकदी पर साफ हाथ साफ कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित ज्योति हथगेल अपनी गंभीर रूप से बीमार माँ तारा बाई (जो दिल की बीमारी से पीड़ित हैं) के इलाज के लिए 19 अगस्त की सुबह अपने पति अमर हथगेल के साथ घर में ताला बंद कर बिलासपुर रेलवे अस्पताल गई थीं। परिवार जब अगले दिन 20 अगस्त की तड़के करीब 3 बजे भोपाल एक्सप्रेस से लौटकर वापस अपने घर पहुँचा, तो उनके होश उड़ गए। मुख्य दरवाजे पर बाहर का ताला तो लगा था लेकिन अंदर से सिटकनी बंद थी। जब परिजनों ने पीछे जाकर देखा तो घर की सीट टूटी हुई थी और चोर पीछे के रास्ते से अंदर दाखिल हुए थे। कमरे में रखी आलमारी का लॉक और लॉकर टूटा पड़ा था और उसमें रखे सोने-चाँदी के भारी-भरकम आभूषण जिसमें सोने का हार, कंगन, बिंदिया, झुमके, अंगूठी, चाँदी की पायल, सिक्के, करधन और नगदी समेत करीब 95,000 रुपये से अधिक का सामान चोरी हो चुका था। पीड़ित परिवार की लिखित रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ धारा 331(4) व 305(a) बीएनएस के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन इलाके में लगातार बढ़ती चोरियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानून-व्यवस्था ध्वस्त,आम जनता में पुलिस के प्रति तीखा आक्रोश
रेलवे कॉलोनी जैसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके में घटित इस वारदात ने स्थानीय पुलिस और गश्ती व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब एक परिवार अपनी लाचार माँ की जान बचाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहा था, तब शहर की सड़कों पर गश्त का दावा करने वाली पुलिस सोती रही। लोगों का आरोप है कि रात के समय गश्त के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जिसके चलते बेखौफ अपराधी जब चाहें किसी भी सूने मकान को अपना शिकार बना लेते हैं। इस घटना के बाद से आम नागरिकों का पुलिस प्रशासन के प्रति गुस्सा चरम पर है। जनता अब सवाल उठा रही है कि अगर रिहायशी इलाकों में दिन-रात ताले तोड़कर चोरी की घटनाएँ होंगी, तो आम आदमी खुद को और अपनी संपत्ति को किसके भरोसे सुरक्षित छोड़े? स्थानीय नागरिकों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि कागजी कायमी से आगे बढ़कर जल्द से जल्द चोरों को सलाखों के पीछे भेजा जाए और इलाके में रात्रि गश्त को सख्ती से प्रभावी बनाया जाए।
